प्रश्न: क्या बाइबल उद्धार के साथ शारीरिक चंगाई का वादा करती है?


उत्तर: “यीशु मसीह ने आपकी बीमारियां उठा ली हैं और शारीरिक चंगाई आप का अधिकार हैबाइबल की चंगाई से सम्बंधित आयतों को लेके उनकी अपने ऊपर घोषणा कीजिये, बिमारियों को डाटिये और अपनी चंगाई को अधिकारपूर्वक ले लीजिये। “

 आपने बहुत से प्रचारकों से ऐसी उद्घोषणाएं सुनी होंगी और बहुत सी किताबों या पत्रिकाओं में पड़ी होगी। आप में से कुछ ने इसको ट्राई भी किया होगा, लेकिन आपका कैंसर, डायबिटीज, लकवा अभी भी वही का वही हैं  और आप सोंचते होंगे की यदि परमेश्वर ने वादा किया है और मैं पूरा विश्वास भी रखता हूँ और अकेले में ही नहीं लोगों के सामने भी घोषणा करता हूँ तो फिर मैं चंगा क्यों नहीं हो रहा हूँ? क्या परमेश्वर ने वास्तव में शारीरिक चंगाई का वादा किया है? आइये हम इस प्रश्न का उत्तर साथ में बाइबल में ढूंढते हैं क्योंकि रोमियों 3:4 में लिखा हे की सब मनुष्य झूठे ठहरे और सिर्फ परमेश्वर सच्चा ठहरे. कोई प्रचारक हमे क्या कहते हैं ये हमारा आधार नहीं है। हमारा आधार हे बाइबल- परमेश्वर के मुँह से निकले शब्द।

शारीरक चंगाई का  प्रचार करने वाले लोग सबसे ज्यादा निम्नांकित आयत को उद्धृत करते हैं:

“परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।” (यशायाह  53:5)

अगर हम यंहा सन्दर्भ देंखे तो यीशु मसीह हमारे पापों के कारण घायल किया गया, हमारे अधर्म के कामों के लिए कुचला गया। यहाँ सन्दर्भ शारीरिक चंगाई का नहीं हैं . यहाँ सन्दर्भ हैं आत्मिक चंगाई का। हमारी कौनसी शांति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी? आत्मिक शान्ति। हम पाप के कारण परमेश्वर के दुश्मन थे लेकिन  यीशु मसीह के बलिदान के द्वारा उसके और हमारे बीच में शांति स्थापित हो गई। अब वो हमारा दुश्मन नहीं पर पिता और मित्र और रक्षक बन गया हैं। अगर कोड़ों के द्वारा चंगाई की भी बात करें तो ये भी आत्मिक चंगाई ही हैं. पहली ध्यान देने वाली बात तो ये हैं की इब्रानी भाषा में कोड़ों के लिए दिया शब्द ‘चाबुरा (chaburah)’ बहुवचन नहीं पर एक वचन हैं।

आपको क्या लगता हैं इंसानो के द्वारा मारे गए कोड़ों के द्वारा आपका उद्धार हुआ है? नहीं? आपने मनुष्यों की व्यवस्था थोड़े ही तोड़ी हैं जो मनुष्यों के कोड़ों से आपका उद्धार हो जाये। आपके पाप अंततः परमेश्वर के खिलाफ है (भजन संहिता 51:4), इसलिए परमेश्वर ही यीशु मसीह को दंड दे तो आप का उद्धार हो सकता है (यशायाह 53:10-11)। ये एक कोड़ा यहाँ परमेश्वर के द्वारा यीशु मसीह को मारे गए एक कोड़े को इंगित कर रहा हैं। परमेश्वर ने यीशु मसीह को एक कोड़ा मारा और उसके द्वारा हम चंगे  हो गए – इसका मतलब यह हैं की परमेश्वर का हमारे पापों पर जो क्रोध था वो यीशु मसीह पे उंडेल दिया और हम उसके द्वारा आत्मिक रूप से चंगे हो जाये अर्थात उद्धार पा जाएँ। पतरस स्वयं यशायाह 53:5 की व्याख्या  आत्मिक  चंगाई के रूप में करता हैं:

” वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के कोड़े खाने से तुम चंगे हुए। ” (1 पतरस 2:24)

इस वचन के हिसाब से क्रूस पर क्या चढ़ाया गया?  हमारे पाप। पतरस कोड़ों या एक कोड़े के द्वारा यहाँ किस चंगाई की बात कर रहा हैं? आत्मिक चंगाई , जी हाँ पापों से आत्मिक चंगाई।

परन्तु मत्ती निम्न आयतों में यशायाह 53:4-5 की और संकेत करते हुए कहता हैं की यीशु मसीह शारीरिक रूप से चंगाई करने के लिए भी मरा था।

जब संध्या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिन में दुष्टात्माएं थीं और उस ने उन आत्माओं को अपने वचन से निकाल दिया, और सब बीमारों को चंगा किया।

ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो, कि उस ने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया” (मत्ती 8: 16-17)

क्या यह सत्य हैं? हाँ. यह भी पूरी तरह सत्य हैं। पतरस यशायाह की भविष्यवाणी की व्याख्या आत्मिक चंगाई के रूप में करता हैं और मत्ती शारीरक. क्या ये एक दूसरे के विरोध में हैं? नहीं, बिलकुल भी नहीं। पतरस मूल (पाप ) के नाश होने की बात कर रहा हैं और मत्ती मूल के परिणाम (बीमारी) के नाश होने की बात कर रहा हैं। आइये में आपको समझाता हूँ। मनुष्य जाति में बीमारियां कैसे आई? पाप के कारण। यदि पाप (मूल) का नाश हो जायेगा तो बिमारियों (परिणाम) का नाश हो जायेगा क्या? हाँ, बिल्कुल। फिर हो क्यों नहीं रहा ?क्यों हम उद्धार पाने के बाद भी बीमारियां सह रहे हैं? क्योंकि परमेश्वर ने अभी सिर्फ हमारे आत्माओं  का उद्धार किया हैं , हमारे शरीरों का नहीं, हमारे शरीर आज भी भ्र्ष्ट हैं। जब यीशु मसीह आएगा और हमे महिमावान शरीर मिलेंगे तो हमे सब बिमारियों से चंगाई मिल जाएगी । जो प्रचारक आप  से कहते हैं की यीशु मसीह ने आप की बीमारियां  उठा ली । इसलिए आपको शत प्रतिशत चंगा होने का अधिकार हैं ।

वे झूंठे शिक्षक हैं. यीशु मसीह ने आप के पाप उठाये, लेकिन वो कभी आप से ये नहीं कहेंगे की अब आप पाप नहीं कर सकते । यीशु मसीह ने क्रूस पर मृत्यु पर विजय पाई, लेकिन वो कभी आप से यह नहीं कहेंगे की आप अब मर नहीं सकते, पृथ्वी पर ही अमर हो गए हैं । यीशु मसीह ने क्रूस पर सारे शापों को तोड़ दिया, लेकिन वो सामान्यतया आपको ये नहीं कहेंगे की आपकी पत्नी को गर्भ की पीड़ा नहीं होनी चाहिए । वे सिर्फ ये कहते हैं की यीशु मसीह ने आपकी बिमारियों को उठा लिया है,  इसलिए आप का शत  प्रतिशत चंगाई पर अधिकार हैं । वो आपको चंगाई का लालच देके आप से खूब पैसा निकलवा लेते हैं दान और दशमांश के नाम पर. यीशु मसीह ने हमारे पाप उठाये लेकिन फिर भी हम पाप में गिरते हैं, क्यों? क्योंकि हमारे आत्माओं का उद्धार हुआ हैं, शरीरों का नहीं । अभी हमे पाप की गुलामी से आज़ादी मिली है, पाप की उपस्थिति से नहीं । जब हम महिमावान शरीर पाएंगे तो पाप की उपस्थिति भी खत्म हो जाएगी. पाप का सर्वनाश हो जायेगा । निम्न आयतों में देखिये पौलुस इंतज़ार  कर रहा हैं यीशु मसीह के आगमन  का और महिमावान  शरीर पाने  का , ताकि  वो पाप की उपस्थिति से हमेशा के लिए बाहर आ जाये: 

क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।

परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।

 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?

मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं:”

  (रोमियों 7: 22-25)

इसी  तरह से , यीशु मसीह ने पाप उठा लिए तो हमें उसके परिणामों  अर्थात बिमारियों, पीड़ाओं और मृत्यु में से होके क्यों जाना पड़ता है? क्योंकि हमारे शरीरों का उद्धार नहीं हुआ। निम्न आयतों में देखिये पौलुस हमे आशा दिला रहा हैं की शरीरों का उद्धार होने पर हम सब बिमारियों, पीड़ाओं , समस्याओं से छुटकारा पा जायेंगे:

क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु: और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं।

क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।

क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।

 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी।

क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।

 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।”

  (रोमियों 8: 18-23)

निम्न आयतों में यूहन्ना हमे बता रहा हैं की जब हम स्वर्ग में जायेंगे, तो हमारी सारी पीड़ाएँ ख़तम हो जाएँगी और हमारे सारे आंसूं पांच दिए जायेंगे:

“और वह उन की आंखोंसे सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।”

  (प्रकाशितवाक्य  21:4)

और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे।

और फिर श्राप होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे।

और उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उन के माथों पर लिखा हुआ होगा।”

  (प्रकाशितवाकया  22:2-4)

जब ये ऐसा हैं तो क्यों कुछ शिखक झूठी बातें बोलते हैं? पैसा कमाने के लिए । उन्होंने मसीहयत को कमाई का रास्ता बना लिया हैं (1 तिमुथियस 6:5). वो बाइबिल की आयतों का सन्दर्भ के बाहर गलत मतलब निकाल कर आप को भरमाते हैं. पतरस भी ऐसे लोगों के बारे में बताता हैं:

“वैसे ही उस ने (पौलुस ने) अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अज्ञानी  और चंचल लोग (झूंठे शिक्षक) उन के गलत अर्थ देते हैं जैसा की वो सरल बांतों के साथ भी करते हैं और अपने  ही नाश का कारण बनाते हैं।”

  (2 पतरस 3:6)

तो क्या हमे हमारी बिमारियों के विषय में कुछ भी नहीं करना चाहिए? चाहिए, एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण काम करना चाहिए- प्राथना । आपको चंगाई क्लेम नहीं करनी हैं । आपको बिमारी को आज्ञा नहीं देनी चाहिए । उसकी घोषणा नहीं करनी चाहिए; वो तो परमेश्वर के आगे उद्दंडता होगी । आपको सिर्फ प्रार्थना करनी चाहिए क्योंकि धर्मी की प्रार्थना से बहुत कुछ हो सकता हैं (याकूब 5:16-17)। और हाँ यदि परमेश्वर की मर्ज़ी हुई तो आपकी प्रार्थना का उत्तर हाँ में होगा (1 यूहन्ना 5:14) । यदि परमेश्वर आपकी चंगाई की प्रार्थना का उत्तर नहीं देता हैं तो चिंता मत कीजिये , वो आपको आपकी बीमारी के जरिये अपने और नज़दीक ले जा रहा हैं, या आप को आत्मिक अनुशासन सीखा रहा हैं (1 कुरिन्थियों 11:30-32, इब्रानियों 12:7-8) या आप की बिमारी के द्वारा आप से महिमा लेना चाहता हैं । परमेश्वर ने चाहा तो, मैं फिर कभी किसी और लेख में बीमारियों के पीछे परमेश्वर के उद्देश्य के बारे में और भी विस्तार में प्रकाश डालूंगा ।

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