प्रश्न: यीशु मसीह ने तो कभी कोई पाप नहीं किया फिर उसने बपतिस्मा क्यों लिया? और जब यूहन्ना ने मना किया तो उसने क्यों कहा की सारी धार्मिकता को पूरा होने के लिए ऐसा ही होने दे. यीशु मसीह कौनसी धार्मिकता पुरी कर रहा था?


उत्तर: यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले का बपतिस्मा पश्चाताप का बपतिस्मा था. जो अपने पापों से मन फिराता था और धार्मिकता से जीने की इच्छा ज़ाहिर करता था उसको यूहन्ना पानी में मन फिराव का बपतिस्मा देता था यीशु मसीह ने कभी कोई पाप नहीं किया, ना ही कर सकता था, क्योंकि वो तो शरीर में स्वयं पवित्र पवित्र पवित्र परमेश्वर था. वो तो पृथ्वी पर हमारी धार्मिकता बनने आया था. फिर क्यों उसने वो बपतिस्मा लिया? यीशु मसीह ने खुद उत्तर दिया- सारी धार्मिकता को  पूरी करने के लिए. भाई, वो कौनसी धार्मिकता  पूरी  कर रहा था?

इसका उत्तर जानने के लिए हमे एक तथ्य को समझना होगा- उद्धार हमारे कर्मों से नहीं होता लेकिन यीशु मसीह के कर्मों से होता हे. कौनसे  कर्म? यीशु मसीह के जन्म लेने से क्रूस पर मरने तक के सारे कर्मों के द्वारा. जी हाँ, यीशु मसीह ने हमारा उद्धार करने के लिए सिर्फ अपनी जान ही नहीं दी, वो हमारे लिए जिया भी. याद कीजिये पापों की क्षमा के लिए कैसा मेमना चाहिए था? निष्कलंक मेमना. यीशु मसीह व्यवस्था के अधीन जन्मा था ताकि हम जो व्यवस्था की अधीनता में शापित हैं, उसकी आज्ञाकारिता  के द्वारा उद्धार पाए:

(गलातियों 4:4-5)

4 “परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के अधीन उत्पन् हुआ।

5 ताकि व्यवस्था के अधीनों को मोल लेकर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। “

हम लोग व्यवस्था पर खरे नहीं उतरे थे, इसलिए यीशु मसीह ने हमारे स्थान पर एक विकल्प के तौर पर व्यवस्था को पूरा किया ठीक वैसे ही जैसे वो हमारे स्थान पर विकल्प के तौर पर मरा , ताकि हमारा उद्धार हो सके. अब आप समझे कि यीशु मसीह हमको धर्मी ठहराने के लिए खाली मारा ही नहीं पर जिया भी? एक बात गौर करने की है कि यीशु मसीह व्यवस्था के अधीन स्वयं के खातिर नहीं हुआ बल्कि हमारे खातिर हुआ. सरल भाषा में यीशु मसीह व्यवस्था का पालन खुद को धर्मी बनाने के लिए नहीं परन्तु हमे धर्मी बनाने के लिए कर रहा था. इसको और स्पष्ट करने के लिए कुछ और आयातों को भी देखिये:

(रोमियों 5:19)

“क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।” 

इस आयत का मतलब है कि आदम की अवज्ञाकारिता के कारण सारी मानव जाती अधर्मी या पापी ठहरी, और दूसरे आदम अर्थात यीशु मसीह की आज्ञाकारिता के द्वारा सब विश्वास करने वाले लोग धर्मी ठहरेंगे. इस आयत से भी स्पष्ट हो जाता है कि यीशु मसीह हमारे खातिर  व्यवस्था का देने वाला और व्यवस्था से ऊपर होने के बावज़ूद  भी मनुष्य रूप में आकर व्यवस्था मान रहा था या आज्ञापालन कर रहा था.

(इब्रानियों 2:17)

 “इस कारण उस को चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्चित्त करे। “

इस आयत से भी स्पष्ट हो जाता है कि यीशु मसीह अपने भाइयों से एकाकार करने या उनके समरूप होने के लिए भी आज्ञा पालन कर रहा था ताकि हर बात में खरा उतर के अंत मे उनके पापों का प्रायश्चित्त कर सके.

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला परमेश्वर की और से आया हुआ पूराने नियम का आखरी भविष्यवक्ता था . यदि यीशु मसीह बपतिस्मा नहीं लेता तो परमेश्वर की अवज्ञा होती परन्तु यीशु मसीह को तो हमारे लिए सम्पूर्ण व्यवस्था और आज्ञाओं का पालन करना था, इसलिए उसने बपतिस्मा लिया.

यीशु मसीह का धन्यवाद् हो कि उसने हमारे लिए सारी धार्मिकता को पूरा किया ताकि हम उसके द्वारा उद्धार पा सकें!!!

2 thoughts on “प्रश्न: यीशु मसीह ने तो कभी कोई पाप नहीं किया फिर उसने बपतिस्मा क्यों लिया? और जब यूहन्ना ने मना किया तो उसने क्यों कहा की सारी धार्मिकता को पूरा होने के लिए ऐसा ही होने दे. यीशु मसीह कौनसी धार्मिकता पुरी कर रहा था?”

  1. Durgesh says:

    बहुत ही अच्छा गॉड ब्लेस यू

  2. Parveen says:

    Very nice ? praise God ?

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