परमेश्वरत्व में कितने व्यक्ति हैं ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-6)

उत्तर: परमेश्वरत्व में तीन व्यक्ति हैं: पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा।  ये तीनों एक परमेश्वर है: अस्तित्व में एक समान और सामर्थ और महिमा में बराबर। (1 यूहन्ना 5:7; मत्ती 28:19)

साक्षी आयतें:

स्वर्ग में गवाही देनेवाले तीन हैं, पिता, वचन, और पवित्र आत्मा; और ये तीनों एक हैं। (1 यूहन्ना 5:7)

इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो (मत्ती 28:19)

व्याख्या: 

त्रिएकता को समझना

त्रिएकता शब्द में एक और  त्रि (तीन) दोनों शब्द आतें हैं। त्रिएक का अर्थ होगा: एक लेकिन फिर भी तीन या तीन लेकिन फिर भी एक। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि एक में तीन है या तीन में एक।  लेकिन क्या ये तार्किक रूप से परस्पर विरोधी (logically contradictory)  बात नहीं है ? नहीं। बिल्कुल भी नहीं। जब हम बोलते हैं की परमेश्वर त्रिएक है तो हमारा मतलब है :

  • परमेश्वर अस्तित्व (essence or being) में एक है।
  • परमेश्वर तीन व्यक्ति (persons) है।

अगर हम ये बोलें: परमेश्वर अस्तित्व में एक है और परमेश्वर अस्तित्व में तीन है, तो वह अतार्किक और  परस्पर विरोधी (contradictory)  बात होगी।

अगर हम ये बोलें : परमेश्वर एक व्यक्ति है और परमेश्वर तीन व्यक्ति है, तो वह अतार्किक और  परस्पर विरोधी (contradictory)  बात होगी।

यह कहना कि परमेश्वर अस्तित्त्व में एक है और तीन व्यक्ति है- अतार्किक और परस्पर विरोधी बात नहीं है। यह रहस्यमय (mysterious) बात है और हमारे पूरी तरह से समझ नहीं आ सकती, क्योंकि परमेश्वर अनंत (infinite) है और हम सीमित। लेकिन हम इसे कुछ हद तक समझ सकते हैं और मसीही जीवन में बढ़ने के साथ इसके ज्ञान में बढ़ सकते हैं। आइये मैं प्रयास करता हूँ आपकी थोड़ी और मदद करने की।

त्रिएकता के विषय में दो गलत शिक्षाएं और उनका खंडन 

1)    तीन ईश्वर हैंपितापुत्र  और पवित्र आत्मा।

बाइबल के अनुसार एक ही परमेश्वर है। बाइबल की आयतें देखें :

“हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्‍वर है, यहोवा एक ही है। ” (व्यवस्थाविवरण 6:4)

यह सब तुझ को दिखाया गया, इसलिये कि तू जान रखे कि यहोवा ही परमेश्‍वर है; उसको छोड़ और कोई है ही नहीं। ((व्यवस्थाविवरण 4:35)

क्योंकि परमेश्‍वर एक ही है।  (1 तिमुथियस  2:5)

तुझे विश्‍वास है कि एक ही परमेश्‍वर है; तू अच्छा करता है। (याकूब 2:19)

2)परमेश्वर एक ही व्यक्ति हैजो पुराने नियम में पितानए नियम में पुत्र और पेन्तीकुस्त के दिन से पवित्र आत्मा के रूप में हमारे साथ है।

हमने ऊपर दी गई आयतों में देख लिया है कि मसीही विश्वास एकेश्वरवादी (monotheistic) है, बहुदेववादी (polytheistic) नहीं। अर्थात मसीही विश्वास यह है कि एक ही परमेश्वर है, बहुत सारे नहीं।  परमेश्वर एक है, लेकिन वह एक परमेश्वर तीन भिन्न  व्यक्ति है। यह कहना कि परमेश्वर एक ही व्यक्ति है, जो पुराने नियम में पिता, नए नियम में पुत्र और पेन्तीकुस्त के दिन से पवित्र आत्मा के रूप में है -गलत है।  बाइबल की आयतें देखें :

प्रभु यहोवा (पिता परमेश्वरका आत्मा (पवित्र आत्मामुझ (मुझ प्रभु यीशु मसीहपर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूँ; कि बन्दियों के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूँ। (यशायाह 61:1)

इस आयत में हम एक मात्र परमेश्वरत्व (Godhead) के तीनों भिन्न व्यक्तियों (पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा) के दर्शन पाते हैं।

यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिए आकाश खुल गया, और उसने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई : “यह मेरा प्रिय पुत्र हैजिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ।” (मत्ती 3:16-19)

यहाँ हमने देखा की तीन भिन्न व्यक्ति हैं।  प्रभु यीशु मसीह नीचे पानी में खड़े हैं, पवित्र आत्मा कबूतर के सामान उतरा, और फिर परमेश्वर पिता ने कहा की वह अपने पुत्र अर्थात प्रभु यीशु मसीह से अति प्रसन्न है।

मैं पिता से विनती करूँगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात् सत्य का आत्मा।  (यूहन्ना 14:16-17)

यहाँ भी हम तीन भिन्न व्यक्ति देखतें हैं : प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर पिता से पवित्र आत्मा भेजने के लिए विनती करेंगे।

परमेश्वर के बारे में सही कथन 

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  • परमेश्वर एक है।
  • परमेश्वर तीन नहीं है।
  • परमेश्वर तीन व्यक्ति है।
  • पिता परमेश्वर है।
  • पुत्र अर्थात प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर है। [प्रभु यीशु मसीह पृथ्वी पर अवतार लेने के वक्त पुत्र नहीं बने, बल्कि परमेश्वर के अनादि (जिसकी कोई शुरुवात नहीं) पुत्र हैं।]
  • पवित्र आत्मा परमेश्वर है।
  • पिता पिता ही है; वह पुत्र और पवित्र आत्मा नहीं है।
  • पुत्र पुत्र ही है; वह पिता और पवित्र आत्मा नहीं है।
  • पवित्र आत्मा पवित्र आत्मा ही है, वह पिता और पुत्र नहीं है।
  • पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा अनादि काल से अनंत काल तक एक मात्र परमेश्वर है। या यूं कहें कि एक मात्र परमेश्वर अनादि काल से अनंत काल तक तीन व्यक्तियों में विध्यमान है। तीनों व्यक्तियों में परमेश्वरत्व है। तीनों व्यक्ति सर्व शक्तिमान, सर्व ग्यानी और सर्व व्याप्त हैं।

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