(Doctrine of Total Depravity) सम्पूर्ण भ्रष्टता या सम्पूर्ण असमर्थता की शिक्षा/सिद्धांत

मनुष्य पूरी तरह भ्रष्ट या पापों में मारा हुआ है. वह परमेश्वर को नहीं चुन सकता, ना ही वह परमेश्वर के पास आना चाहता है. उसके महान से महान कार्य परमेश्वर की नज़रों में पाप है क्योंकि जो विश्वास से नहीं और परमेश्वर की महिमा के लिए नहीं, वो सब पाप है. मनुष्य जन्म से… Continue reading (Doctrine of Total Depravity) सम्पूर्ण भ्रष्टता या सम्पूर्ण असमर्थता की शिक्षा/सिद्धांत

मरकुस 11:22-24 की विश्वास का वचन प्रचारकों (Word Faith Preachers) द्वारा की गई व्याख्या का खंडन

यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “परमेश्वर में विश्वास रखो। मैं तुमसे सत्य कहता हूँ यदि कोई इस पहाड़ से यह कहे, ‘तू उखड़ कर समुद्र में जा गिर’ और उसके मन में किसी तरह का कोई संदेह न हो बल्कि विश्वास हो कि जैसा उसने कहा है, वैसा ही हो जायेगा तो उसके लिये वैसा… Continue reading मरकुस 11:22-24 की विश्वास का वचन प्रचारकों (Word Faith Preachers) द्वारा की गई व्याख्या का खंडन

व्याख्या विज्ञान (HERMENEUTICS)

बाइबल के किसी भी सरल या कठिन पद को समझने के लिए हमें  व्याख्या विज्ञान का सहारा लेना चाहिए। व्याख्या विज्ञान के निम्नांकित नियम बाइबल के कठिन पदों की व्याख्या करने मे हमारी मदद करते हैं: 1. बाइबल , बाइबल का व्याख्यान करती है. सम्पूर्ण बाइबल मे सामंजस्य है। बाइबल अपनी ही बात का खंडन… Continue reading व्याख्या विज्ञान (HERMENEUTICS)

प्रश्न: क्या बाइबल उद्धार के साथ शारीरिक चंगाई का वादा करती है?

उत्तर: “यीशु मसीह ने आपकी बीमारियां उठा ली हैं और शारीरिक चंगाई आप का अधिकार है। बाइबल की चंगाई से सम्बंधित आयतों को लेके उनकी अपने ऊपर घोषणा कीजिये, बिमारियों को डाटिये और अपनी चंगाई को अधिकारपूर्वक ले लीजिये। “  आपने बहुत से प्रचारकों से ऐसी उद्घोषणाएं सुनी होंगी और बहुत सी किताबों या पत्रिकाओं… Continue reading प्रश्न: क्या बाइबल उद्धार के साथ शारीरिक चंगाई का वादा करती है?

विश्वास क्या है?

विश्वास

1. वो जो मेरे में से निकलता है विश्वास नहीं है। वो जो वचन को सुनने के द्वारा परमेश्वर की और से मुझे दान स्वरूप मिलता है, वो विश्वास है।  2. विश्वास मेरी ओर से परमेश्वर को उपहार नहीं है। विश्वास परमेश्वर की ओर से मुझे दान है।  3. मैं जो चाहता हूँ ( बीमारी… Continue reading विश्वास क्या है?

क्या यीशु मसीह हमे धनवान बनाने के लिए मरा?

तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ। (2 कुरिन्थिओ 8:9) बैनी हिन्, क्रेफलो डॉलर, जोसफ प्रिंस, जॉयस मायर,पॉल दिनाकरन, अंकुर नरूला, पी जी वर्घिस आदि समृद्धि गॉस्पेल के प्रचारक इस आयत को लेके… Continue reading क्या यीशु मसीह हमे धनवान बनाने के लिए मरा?

प्रश्न: आग का बपतिस्मा क्या है?

उत्तर: अक्सर लोग मत्ती 3:11 का प्रयोग करके आग के बपतिस्मे के बारे में प्रचार करते हैं. आपने लोगों को परमेश्वर से आग का बपतिस्मा मांगते हुए भी देखा होगा. कृपया निम्नलिखित पदों को ध्यान से ज़ोर ज़ोर से 2-3 बार पड़े और सन्दर्भ के हिसाब से अर्थ निकाले: “आयत 11 मैं तो पानी से… Continue reading प्रश्न: आग का बपतिस्मा क्या है?

प्रश्न : “तौभी बच्चे जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी, यदि वे संयम सहित विश्वास, प्रेम, और पवित्रता में स्थिर रहें॥” ( 1 तीमुथियुस 2:15) इस आयत का मतलब क्या है? क्या स्त्रियां वास्तव मे बच्चा जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी?

उत्तर: नहीं. असंभव. हम जानते हैं की उद्धार बच्चे जन्माने (इफिसियों 2:6-9) के दवारा नहीं होता  बल्कि पवित्र आत्मा से जन्मने के दवारा होता है (यूहन्ना 3:5). 1 तीमुथियुस 2:15 एक कठिन आयत है. ऐसी कठिन आयतों की व्याख्या करने के लिए हमे तीन  बातें ध्यान रखनी चाहिए. पहली की सम्पूर्ण बाइबिल इस बारे में… Continue reading प्रश्न : “तौभी बच्चे जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी, यदि वे संयम सहित विश्वास, प्रेम, और पवित्रता में स्थिर रहें॥” ( 1 तीमुथियुस 2:15) इस आयत का मतलब क्या है? क्या स्त्रियां वास्तव मे बच्चा जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी?

परमेश्वर का नाम व्यर्थ में लेना क्या होता है?

तीसरी आज्ञा कहती है: “तू अपने प्रभु परमेश्वर का नाम व्यर्थ ना लेना. जो कोई उसका नाम व्यर्थ लेगा उसे वो किसी रीती से निर्दोष नहीं ठहराएगा.” परमेश्वर का नाम व्यर्थ लेने का अर्थ क्या है? मूल भाषा में “लेने” के लिए जो शब्द इस्तेमाल किया गया है वो है “नासा”. जिसका अर्थ सिर्फ “लेना”… Continue reading परमेश्वर का नाम व्यर्थ में लेना क्या होता है?

आइये आत्मिक तमीज सींखे

बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के सामने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है,  इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों॥ (सभोपदेशक 5:2) तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष… Continue reading आइये आत्मिक तमीज सींखे