क्या आदम के पाप में सम्पूर्ण मनुष्य जाति पतित हो (गिर) गई ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-15)

क्या आदम के पाप में सम्पूर्ण मनुष्य जाति पतित हो (गिर) गई ?

उत्तर: आदम के साथ बाँधी गई वाचा सिर्फ उसके लिए नहीं थी, परन्तु उसके सम्पूर्ण वंश के लिए भी थी। सामान्य प्रजनन के द्वारा उससे उत्पन्न सम्पूर्ण मनुष्य जातिसामान्य प्रजनन के द्वारा उससे उत्पन्न सब मनुष्य ने उसमे पाप किया और उसके पाप में पतित हो गए।  (1 कुरिन्थियों 15:22; रोमियों 5:12)

साक्षी आयतें:     

और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसे ही मसीह में सब जिलाए जाएँगे  (1 कुरिन्थियों 15:22)

 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। ( रोमियों 5:12)

व्याख्या:

आदम हमारा प्रतिनिधित्वकर्ता था। उसने जब पाप किया तो हम सब पाप में गिर गए। उसमे हम सबने पाप कर लिया। सामान्य प्रजनन के द्वारा उससे उत्पन्न सब मनुष्य पापी स्वाभाव लेकर ही पैदा होते हैं। सिर्फ यीशु मसीह ही हैं जो सामान्य प्रजनन के द्वारा पैदा नहीं हुआ और इसलिए उसमे पहले आदम का बीज नहीं था। वो निष्पाप पैदा हुआ। उसका जन्म असामान्य, असाधारण और अद्वितीय था। लेकिन उसके अलावा सारे मनुष्य पापी ही पैदा हुए । हम पाप करके पापी नहीं बनते; बल्कि हम पाप करते हैं, क्योंकि हम पापी ही पैदा हुए हैं- ठीक उसी तरह जैसे कुत्ता भौंख कर कुत्ता नहीं बनता, बल्कि भौंकता हैं, क्योंकि कुत्ता है। चूँकि हम आदम में पापी हैं और रोज जान-बूझ कर परमेश्वर के खिलाफ पाप करते हैं, हम परमेश्वर के शाप के अंतर्गत हैं और दुःख भी उठाते हैं और मरते भी हैं। आइये कुछ आयतें पढ़ें, जहाँ यह सब स्पष्ट रूप से लिखा है:

और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसे ही मसीह में सब जिलाए जाएँगे (1 कुरिन्थियों 15:22)

इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। ( रोमियों 5:12)

जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। (रोमियों 5:19)

इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्‍वर की महिमा से रहित हैं (रोमियों 3:23)

देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ,और पाप के साथ अपनी माता के गर्भमें पड़ा। (भजन संहिता 51:5)

परन्तु उदार धर्मशास्त्री (liberal theologians) इस शिक्षा को नहीं मानते। उनमें से कुछ तो कहते हैं कि मनुष्य अच्छा है और परमेश्वर को खोजने में सक्षम हैं। इनको पेलाजियनवादी (Pelagians) कहा जाता है। कुछ कहते हैं कि मनुष्य पापी तो है लेकिन जब परमेश्वर अपना सन्देश भेजता है और अपने पास बुलाता है तो वो उसके निमंत्रण को स्वीकार करके उसके पास आने में सक्षम हैं। इन्हें अर्ध-पेलाजियनवादी (Semi-pelagians), आर्मिनवादी (Arminians) या प्रबंधवादी (Provisionalists) कहा जाता है। इन उदार धर्मशास्त्रियों के विपरीत सही धर्मशास्त्री होते हैं जिन्हें ऑगस्तिनवादी (Augustinians), कैल्विनवादी (Calvinists) या अनुग्रहवादी कहा जाता है, जो यह कहते हैं मनुष्य ना तो परमेश्वर को खोज सकता है; ना हीं उसके निमंत्रण को स्वीकार करके उसके पास आ सकता है- ठीक वैसे ही जैसे ना तो कुत्ता अपने आप को अपनी क्षमता से भेड़ बना सकता है, ना हीं परमेश्वर के निमंत्रण के उत्तर में। सिर्फ परमेश्वर ही है जो अपनी संप्रभु सामर्थ में मनुष्य पर से पतन के प्रभाव को नष्ट कर सकता है।

कोई उत्तम (अच्छा) नहीं, केवल एक अर्थात् परमेश्‍वर। (मरकुस 10:18)

कोई मेरे पास नहीं आ सकता जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले (यूहन्ना 6:44)

वे बहुत ही चकित होकर आपस में कहने लगे, “तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?” यीशु ने उनकी ओर देखकर कहा, “मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्‍वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्‍वर से सब कुछ हो सकता है।” ((मरकुस 10:26-27)

निष्कर्ष में मैं यह कहना चाहता हूँ कि ये उदार धर्मशास्त्री कोई छोटी-मोटी त्रुटि नहीं कर रहे हैं। ये आरोपण के सिद्धांत (Doctrine of Imputation) को बिगाड़ रहे हैं और सुसमाचार को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। ये मसीही नहीं हैं। ये गैर-मसीही भी नहीं हैं। ये मसीही विरोधी (anti-Christ) हैं। यदि आदम के पाप हम पर आरोपित (impute) नहीं हुए थे, तो फिर येशु की धार्मिकता भी हम पर आरोपित (impute) नहीं हो सकती। और यदि ऐसा नहीं हो सकता तो, उद्धार के लिए क्या आशा रह जाएगी ?

 

 

 

 

 

 

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