(Doctrine of Total Depravity) सम्पूर्ण भ्रष्टता या सम्पूर्ण असमर्थता की शिक्षा/सिद्धांत

Total Depravity

मनुष्य पूरी तरह भ्रष्ट या पापों में मारा हुआ है. वह परमेश्वर को नहीं चुन सकता, ना ही वह परमेश्वर के पास आना चाहता है. उसके महान से महान कार्य परमेश्वर की नज़रों में पाप है क्योंकि जो विश्वास से नहीं और परमेश्वर की महिमा के लिए नहीं, वो सब पाप है. मनुष्य जन्म से ही पाप में मारा हुआ है और वो अपने को नहीं बदल सकता; ना ही बदलना चाहता है. वह जान बूझ कर स्वेच्छा से परमेश्वर के खिलाफ विद्रोह कर रहा है. इस शिक्षा या सिद्धांत को हम बाइबल की हर किताब में बहुतायात और स्पष्टता के साथ देख सकते हैं. उनमे से कुछ साक्षी आयतें (prooftexts) हम नीचे दे रहें हैं. इस शिक्षा या सिद्धांत को हम बाइबल की हर किताब में बहुतायात और स्पष्टता के साथ देख सकते हैं. उनमे से कुछ साक्षी आयतें (prooftexts) हम नीचे दे रहें हैं.

Original sin:

Gen. 2:17

“For in the day that thou eatest thereof thou shalt surely die” .


17. पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा॥

Romans 5:12:

“Wherefore, as by one man sin entered into the world, and death by sin; and so death passed upon all men, for that all have sinned.”

12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।

1 cor 15: 22

For as in Adam all die
22. और जैसे आदम में सब मरते हैं,

Genesis 5:3

And Adam lived an hundred and thirty years, and begat a son in his own likeness, after his image; and called his name Seth.

3. जब आदम एक सौ तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा उसकी समानता में उस ही के स्वरूप के अनुसार एक पुत्र उत्पन्न हुआ उसका नाम शेत रखा।

Job 14:4

Who can bring a clean thing out of an unclean? not one.

4. अशुद्ध वस्तु से शुद्ध वस्तु को कौन निकाल सकता है? कोई नहीं।

Psalm 51:5

Behold I was shapen in iniquity; and in sin did my mother conceive me.

5. देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा॥

Psalm 58:3

The wicked are estranged from the womb: they go astray as soon as they be born, speaking lies.

3. दुष्ट लोग जन्मते ही पराए हो जाते हैं, वे पेट से निकलते ही झूठ बोलते हुए भटक जाते हैं।

Eph. 2:1

“And you hath he quickened, who were dead in trespasses and sins”

और उस ने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।

Total Depravity

jeremiah 17:9

“The heart is more deceitful than all else And is desperately sick; Who can understand it?

9. मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?

Genesis 6:5

And God saw that the wickedness of man was great in the earth, and that every imagination of the thoughts of his heart was only evil continually.

5. और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।

Genesis 8:21

And the Lord smelled a sweet savour; and the Lord said in his heart, I will not again curse the ground any more for man’s sake; for the imagination of man’s heart is evil from his youth; neither will I again smite any more every thing living, as I have done.

21. इस पर यहोवा ने सुखदायक सुगन्ध पाकर सोचा, कि मनुष्य के कारण मैं फिर कभी भूमि को शाप न दूंगा, यद्यपि मनुष्य के मन में बचपन से जो कुछ उत्पन्न होता है सो बुरा ही होता है; तौभी जैसा मैं ने सब जीवों को अब मारा है, वैसा उन को फिर कभी न मारूंगा।

Job 15:14-16

What is man, that he should be clean? and he which is born of a woman, that he should be righteous? Behold, he putteth no trust in his saints; yea, the heavens are not clean in his sight. How much more abominable and filthy is man, which drinketh iniquity as water.

14. मनुष्य है क्या कि वह निष्कलंक हो? और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ वह है क्या कि निर्दोष हो सके?15. देख, वह अपने पवित्रों पर भी विश्वास नहीं करता, और स्वर्ग भी उसकी दृष्टि में निर्मल नहीं है।16. फिर मनुष्य अधिक घिनौना और मलीन है जो कुटिलता को पानी की नाईं पीता है।

Psalm 14:1-3

The fool hath said in his heart, There is no God. They are corrupt, they have done abominable works, there is none that doeth good. The Lord looked down from heaven upon the children of men, to see if there were any that did understand, and seek God. They are all gone aside, they are all together become filthy: there is none that doeth good, no, not one.

मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं।परमेश्वर ने स्वर्ग में से मनुष्यों पर दृष्टि की है, कि देखे कि कोई बुद्धिमान, कोई परमेश्वर का खोजी है या नहीं।वे सब के सब भटक गए, वे सब भ्रष्ट हो गए; कोई सुकर्मी नहीं, एक भी नहीं।

Jeremiah 4:22

For my people is foolish, they have not know me; they are sottish children, and they have no understanding: they are wise to do evil, but to do good they have no knowledge.

22. क्योंकि मेरी प्रजा मूढ़ है, वे मुझे नहीं जानते; वे ऐसे मूर्ख लड़के हैं जिन में कुछ भी समझ नहीं। बुराई करने को तो वे बुद्धिमान हैं, परन्तु भलाई करना वे नहीं जानते।

Jeremiah 13:23

Can the Ethiopian change his skin, or the leopard his spots? Then may ye also do good, that are accustomed to evil.

23. क्या हबशी अपना चमड़ा, वा चीता अपने धब्बे बदल सकता है? यदि वे ऐसा कर सकें, तो तू भी, जो बुराई करना सीख गई है, भलाई कर सकेगी।

John 6:44

No man can come to me, except the Father which hath sent me draw him: and I will raise him up at the last day.

44. कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिस ने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उस को अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।

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Romans 3:9-19

What then? are we better than they? No, in no wise: for we have before proved both Jews and Gentiles that they are all under sin; as it is written, There is none righteous, no, not one: there is none that understandeth, there is none that seeketh after God. They are all gone out of the way, they are all together become unprofitable; there is none that doeth good, no, not one. Their throat is an open sepulchre; with their tongues they have used deceit; the poison of asps is under their lips: whose mouth is full of cursing and bitterness: their feet are swift to shed blood: destruction and misery are in their ways: and the way of peace they have not known: there is no fear of God before their eyes. Now we know that what things soever the law saith, it saith to them who are under the law: that every mouth may be stopped, and all the world may become guilty before God.

9.तो फिर क्या हुआ? क्या हम उन से अच्छे हैं? कभी नहीं; क्योंकि हम यहूदियों और यूनानियों दोनों पर यह दोष लगा चुके हैं कि वे सब के सब पाप के वश में हैं।10.जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।11.कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं।12.सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं। 13.उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है. 14.और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है।15.उन के पांव लोहू बहाने को फुर्तीले हैं।16.उन के मार्गों में नाश और क्लेश हैं।17.उन्होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना।18.उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।19.हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे।

Romans 8:7, 8

Because the carnal mind is enmity against God: for it is not subject to the law of God, neither indeed can be. So then they that are in the flesh cannot please God.

7. क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है।8. और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।

Colossians 2:13

And you, being dead in your trespasses and the uncircumcision of your flesh, hath he quickened together with him, having forgiven you all trespasses.

13. और उस ने तुम्हें भी, जो अपने अपराधों, और अपने शरीर की खतनारिहत दशा में मुर्दा थे, उसके साथ जिलाया, और हमारे सब अपराधों को क्षमा किया।

Ephesians 2:1-2, 4-5

And you were dead in the trespasses and sins in which you once walked… But God, being rich in mercy, because of the great love with which he loved us, even when we were dead in our trespasses, made us alive together with Christ—by grace you have been saved.

1. और उस ने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।2. जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।4. परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया।5. जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)

Mark 10:18

“Why do you call me good?” Jesus answered. “No one is good–except God alone.

यीशु ने उसे उत्तर दिया, “तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? केवल परमेश्वर के सिवा और कोई उत्तम नहीं है।

Romans 11:32 

For God has consigned all to disobedience, that he may have mercy on all. (c.f. Galatians 3:22)

32. क्योंकि परमेश्वर ने सब को आज्ञा न मानने के कारण बन्द कर रखा ताकि वह सब पर दया करे॥

Total Depravity

Romans 3:23 

for all have sinned and fall short of the glory of God
23. इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।

2 Chronicles 6:36 

“there is no one who does not sin”
36. निष्पाप तो कोई मनुष्य नहीं है, यदि वे भी तेरे विरुद्ध पाप करें और तू उन पर कोप कर के उन्हें शत्रुओं के हाथ कर दे, और वे उन्हें बन्धुआ कर के किसी देश को, चाहे वह दूर हो, चाहे निकट, ले जाएं,

Mark 7:21-23 

“For from within, out of the heart of man, come evil thoughts, sexual immorality, theft, murder, adultery, coveting, wickedness, deceit, sensuality, envy, slander, pride, foolishness. All these evil things come from within, and they defile a person.” (c.f. Matthew 15:19)

21. क्योंकि भीतर से अर्थात मनुष्य के मन से, बुरी बुरी चिन्ता, व्यभिचार।22. चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं।23. ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं॥

Ecclesiastes 9:3 

Also, the hearts of the children of man are full of evil, and madness is in their hearts while they live, and after that they go to the dead.

जो कुछ सूर्य के नीचे किया जाता है उस में यह एक दोष है कि सब लोगों की एक सी दशा होती है; और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है, और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।

Ephesians 4:17-18 

you must no longer walk as the Gentiles do, in the futility of their minds. They are darkened in their understanding, alienated from the life of God because of the ignorance that is in them, due to their hardness of heart.

17. इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो।
18. क्योंकि उनकी बुद्धि अन्धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्वर के जीवन से अलग किए हुए हैं।

Jeremiah 10:7-8,14 

among all the wise ones of the nations and in all their kingdoms there is none like you. They are both stupid and foolish… Every man is stupid and without knowledge.

7. हे सब जातियों के राजा, तुझ से कौन न डरेगा? क्योंकि यह तेरे योग्य है; अन्यजातियों के सारे बुद्धिमानों में, और उनके सारे राज्यों में तेरे समान कोई नहीं है।8. परन्तु वे पशु सरीखे निरे मूर्ख हैं; मूर्त्तियों से क्या शिक्षा? वे तो काठ ही हैं!
14. सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित हैं; अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण सब सुनारों की आशा टूटती है; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें झूठी हैं, और उन में सांस ही नहीं है।

Total Depravity

Titus 3:3

For we ourselves were once foolish, disobedient, led astray, slaves to various passions and pleasures, passing our days in malice and envy, hated by others and hating one another.

क्योंकि हम भी पहिले, निर्बुद्धि, और आज्ञा न मानने वाले, और भ्रम में पड़े हुए, और रंग रंग के अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे।

Galatians 4:8-9

Formerly, when you did not know God, you were enslaved to those that by nature are not gods. But now that you have come to know God, or rather to be known by God, how can you turn back again to the weak and worthless elementary principles of the world, whose slaves you want to be once more?

8. भला, तक तो तुम परमेश्वर को न जानकर उनके दास थे जो स्‍वभाव से परमेश्वर नहीं।
9. पर अब जो तुम ने परमेश्वर को पहचान लिया बरन परमेश्वर ने तुम को पहचाना, तो उन निर्बल और निकम्मी आदि-शिझा की बातोंकी ओर क्‍योंफिरते हो, जिन के तुम दोबारा दास होना चाहते हो

Romans 6:6,16,17,19,20 

We know that our old self was crucified with him in order that the body of sin might be brought to nothing, so that we would no longer be enslaved to sin. Do you not know that if you present yourselves to anyone as obedient slaves, you are slaves of the one whom you obey…? But thanks be to God, that you who were once slaves of sin have become obedient from the heart to the standard of teaching to which you were committed… For just as you once presented your members as slaves to impurity and to lawlessness leading to more lawlessness, so now present your members as slaves to righteousness leading to sanctification. For when you were slaves of sin, you were free in regard to righteousness.

क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें।

16. क्या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धामिर्कता है

17. परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।

19. मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो।

20. जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे।

Romans 7:18 

For I know that nothing good dwells in me, that is, in my flesh
18. क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।

1 Samuel 24:13 

“As the proverb of the ancients says, ‘Out of the wicked comes wickedness.’”
13. प्राचीनों के नीति वचन के अनुसार दुष्टता दुष्टों से होती है.

Matthew 7:18 

“A healthy tree cannot bear bad fruit, nor can a diseased tree bear good fruit.” (c.f. Luke 6:43)
18. देखो, मैं ने पहिले से तुम से यह सब कुछ कह दिया है।

Matthew 12:34-35 

“How can you speak good, when you are evil? For out of the abundance of the heart the mouth speaks. The good person out of his good treasure brings forth good, and the evil person out of his evil treasure brings forth evil.”

34. यह तो “इस्राएल का राजा है”। अब क्रूस पर से उतर आए, तो हम उस पर विश्वास करें। 35. उस ने परमेश्वर का भरोसा रखा है, यदि वह इस को चाहता है, तो अब इसे छुड़ा ले, क्योंकि इस ने कहा था, कि “मैं परमेश्वर का पुत्र हूं”।

Romans 8:7 

For the mind that is set on the flesh is hostile to God, for it does not submit to God’s law; indeed, it cannot.
क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है।

Total Depravity

1 Corinthians 2:14 

The natural person does not accept the things of the Spirit of God, for they are folly to him, and he is not able to understand them because they are spiritually discerned.

14. परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है।

2 Corinthians 4:3-4 

our gospel is veiled… to those who are perishing. In their case the god of this world has blinded the minds of the unbelievers, to keep them from seeing the light of the gospel of the glory of Christ, who is the image of God.

परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।

John 3:6 

“That which is born of the flesh is flesh”
6. क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।

Hebrews 11:6

And without faith it is impossible to please [God]
6. और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।

Romans 8:7-8 

The mind governed by the flesh is hostile to God; it does not submit to God’s law, nor can it do so. Those who are in the realm of the flesh cannot please God.

7. क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है।8. और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।

Deuteronomy 29:2-4 

And Moses summoned all Israel and said to them: “You have seen all that the Lord did before your eyes in the land of Egypt, to Pharaoh and to all his servants and to all his land, the great trials that your eyes saw, the signs, and those great wonders. But to this day the Lord has not given you a heart to understand or eyes to see or ears to hear.”

2. फिर मूसा ने सब इस्त्राएलियों को बुलाकर कहा, जो कुछ यहोवा ने मिस्र देश में तुम्हारे देखते फिरौन और उसके सब कर्मचारियों, और उसके सारे देश से किया वह तुम ने देखा है; 3. वे बड़े बड़े परीक्षा के काम, और चिन्ह, और बड़े बड़े चमत्कार तेरी आंखों के साम्हने हुए; 4. परन्तु यहोवा ने आज तक तुम को न तो समझने की बुद्धि, और न देखने की आंखें, और न सुनने के कान दिए हैं।

John 3:27

John answered, “A person cannot receive even one thing unless it is given him from heaven.”
27. यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।

John 1:12-13 

But to all who did receive him, who believed in his name, he gave the right to become children of God, who were born, not of blood nor of the will of the flesh nor of the will of man, but of God.

12. परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 13. वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

John 6:44,65 

“No one can come to me unless the Father who sent me draws him. And I will raise him up on the last day.” And he said, “This is why I told you that no one can come to me unless it is granted him by the Father.”

44. कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिस ने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उस को अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
65. और उस ने कहा, इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर यह वरदान न दिया जाए तक तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।

Romans 9:16 

So then it depends not on human will or exertion, but on God, who has mercy.
16. सो यह न तो चाहने वाले की, न दौड़ने वाले की परन्तु दया करने वाले परमेश्वर की बात है।

Romans 11:35-36 

“Or who has given a gift to him that he might be repaid?” For from him and through him and to him are all things.


35. या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए। 36. क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन॥

1 Corinthians 1:30 

And because of him you are in Christ Jesus
30. परन्तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा।

Philippians 2:13 

for it is God who works in you, both to will and to work for his good pleasure.
13. क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है।

Eph. 1:4

“just as He chose us in Him before the foundation of the world, that we would be holy and blameless before Him. In love.”
4. जैसा उस ने हमें जगत की उत्पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों।

Eph. 1:5

“He predestined us to adoption as sons through Jesus Christ to Himself, according to the kind intention of His will.”
5. और अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों,

Eph. 1:11

“also we have obtained an inheritance, having been predestined according to His purpose who works all things after the counsel of His will.”

11. उसी में जिस में हम भी उसी की मनसा से जो अपनी इच्छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है, पहिले से ठहराए जाकर मीरास बने।

2 Thess. 2:13

“But we should always give thanks to God for you, brethren beloved by the Lord, because God has chosen you from the beginning for salvation through sanctification by the Spirit and faith in the truth.”

13. पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्हारे विषय में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहें, कि परमेश्वर ने आदि से तुम्हें चुन लिया; कि आत्मा के द्वारा पवित्र बन कर, और सत्य की प्रतीति करके उद्धार पाओ।

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1 Pet. 1:3

“Blessed be the God and Father of our Lord Jesus Christ, who according to His great mercy has caused us to be born again to a living hope through the resurrection of Jesus Christ from the dead.”  

3. हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिस ने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।

Rom. 6:20

“For when you were slaves of sin, you were free in regard to righteousness.”
20. जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे।

Who supplies faith/belief/repentance?

Acts 16:14 

One who heard us was a woman named Lydia, from the city of Thyatira, a seller of purple goods, who was a worshiper of God. The Lord opened her heart to pay attention to what was said by Paul.

14. सब्त के दिन हम नगर के फाटक के बाहर नदी के किनारे यह समझकर गए, कि वहां प्रार्थना करने का स्थान होगा; और बैठकर उन स्त्रियों से जो इकट्ठी हुई थीं, बातें करने लगे।

1 Corinthians 3:6 

I planted, Apollos watered, but God gave the growth.
6. मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया।

Acts 5:31 

“God exalted him at his right hand as Leader and Savior, to give repentance to Israel and forgiveness of sins.”

31. उसी को परमेश्वर ने प्रभु और उद्धारक ठहराकर, अपने दाहिने हाथ से सर्वोच्च कर दिया, कि वह इस्त्राएलियों को मन फिराव की शक्ति और पापों की क्षमा प्रदान करे।

Acts 11:18

When they heard these things they fell silent. And they glorified God, saying, “Then to the Gentiles also God has granted repentance that leads to life.”

18. यह सुनकर, वे चुप रहे, और परमेश्वर की बड़ाई करके कहने लगे, तब तो परमेश्वर ने अन्यजातियों को भी जीवन के लिये मन फिराव का दान दिया है॥

Philippians 1:29 

For it has been granted to you that for the sake of Christ you should… believe in him
29. क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ।

Acts 18:27

When he arrived, he greatly helped those who through grace had believed
27. वह आराधनालय में निडर होकर बोलने लगा, पर प्रिस्किल्ला और अक्विला उस की बातें सुनकर, उसे अपने यहां ले गए और परमेश्वर का मार्ग उस को और भी ठीक ठीक बताया।

Ephesians 2:8-9

For by grace you have been saved through faith. And this is not your own doing; it is the gift of God, not a result of works, so that no one may boast.

8. क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।9. और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।

Romans 12:3 

For by the grace given to me I say to everyone among you not to think of himself more highly than he ought to think, but to think with sober judgment, each according to the measure of faith that God has assigned.

3. क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।

2 Timothy 2:24-25 

And the Lord’s servant must not be quarrelsome but kind to everyone, [etc.]… God may perhaps grant them repentance leading to a knowledge of the truth

24. और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।25. और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें।

1 Corinthians 12:3 

no one can say “Jesus is Lord” except in the Holy Spirit.
3. इसलिये मैं तुम्हें चितौनी देता हूं कि जो कोई परमेश्वर की आत्मा की अगुआई से बोलता है, वह नहीं कहता कि यीशु स्त्रापित है; और न कोई पवित्र आत्मा के बिना कह सकता है कि यीशु प्रभु है॥

2 Peter 1:3 

His divine power has granted to us all things that pertain to life and godliness, through the knowledge of him who called us to his own glory and excellence

3. क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।

Romans 11:36

For from him and through him and to him are all things.
36. क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन॥

1 Corinthians 4:7 

For who sees anything different in you? What do you have that you did not receive? If then you received it, why do you boast as if you did not receive it?

7. क्योंकि तुझ में और दूसरे में कौन भेद करता है? और तेरे पास क्या है जो तू ने (दूसरे से) नहीं पाया: और जब कि तु ने (दूसरे से) पाया है, तो ऐसा घमण्ड क्यों करता है, कि मानों नही पाया?

John 3:6

“That which is born of the flesh is flesh, and that which is born of the Spirit is spirit. It is the Spirit who gives life; the flesh is no help at all.”
6. क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।

1 thought on “(Doctrine of Total Depravity) सम्पूर्ण भ्रष्टता या सम्पूर्ण असमर्थता की शिक्षा/सिद्धांत”

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