क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

क्रिसमस का नाम सुनते ही शायद आपकी आँखों के सामने सांता क्लॉज़, क्रिसमस ट्री आदि की तस्वीर आती होगी और आपके कानों में जिंगल बेल्स कि धुन घुलने लगती होगी, लेकिन ये सब तो मनोरंजन के लिए हैं. आइये मैं आपको क्रिसमस का असली मतलब समझाता हूँ:

 क्रिसमस  यीशु मसीह के महिमावान जन्म के स्मरण में मनाया जाता है. क्या आपने कभी सोंचा की यीशु मसीह जो की परमेश्वर का बेटा है वो पृथ्वी पर क्यों आया? आपके लिए ये जानना अनंत  महत्वपूर्ण है. परमेश्वर का बेटा यीशु मसीह पृथ्वी पर आपके पापों की क्षमा के लिए सिद्ध (पूरी तरह निष्पाप) जीवन जीने और क्रूस पर मरने आया. अब आप पूछेंगे मेरे पापों की क्षमा के लिए? जी हाँ, आपके पापों की क्षमा के लिए.  अब  शायद आप पूछेंगे कौनसे पाप ? आइये देखते हैं:

झूठ: यदि आपने झूठ बोला है तो आप  झूठे बन गए. (निर्गमन 20 :16 , नीतिवचन 6 :17 )

चोरी: शायद आपने  किसी बैंक में डाका नहीं डाला हो, लेकिन यदि परीक्षा में नक़ल की है या किसी की कोई भी चीज़ बिना पूछे ले ली हो और अपनी बना ली हो, चाहे वो एक पेंसिल, एक फल या एक रूपया ही क्यों ना हो तो भी वो चोरी हे और आप चोर बन गए हैं . (निर्गमन 20 :15 )

रिश्वतखोरी: यदि आपने रिश्वत ली या दी है तो आप रिश्वतखोर बन गए.  (निर्गमन 23 :8)

लालच: यदि आपने लालच किया तो आप लालची बन गए. (निर्गमन 20 :17)

ईर्ष्या: यदि आपने किसी से ईर्ष्या की तो आप ईर्ष्यालु बन गए. (1 कुरिन्थियों 3 :3 )

घमंड: यदि आपने घमंड किया या डींग हाँकी तो आप घमंडी बन गए. (नीतिवचन 6 :17 )

चुगली: यदि आपने किसी की चुगली की तो आप चुगली करने वाले बन गए. (लैवव्यवस्था 19 :16 , याकूब 4 :11 -12)

नशा: यदि आपने नशा किया तो आप व्यसनी बन गए. (1 कुरिन्थियों 6 :10)

माता पिता का अपमान : शायद आपने माता पिता को गाली ना दी हो , उन को सताया ना हो पर फिर भी जाने अनजाने उनका अपमान किया है. इस तरह से आप माता पिता का निरादर करने वाले बन गए.  (निर्गमन 20 :12 )

हत्या: आपने शायद किसी को बन्दूक या तलवार से नहीं मारा हो, परन्तु बाइबिल कहती है की यदि आपने किसी से नफरत की, कड़वाहट रखी, बैर रखा, मन में क्रोध से भर के गाली दी तो भी आप हत्या कर चुके.  (निर्गमन 20 :13 , नीतिवचन 6 :17 , मत्ती 5 :21 -22 , 1 यूहन्ना 3 :15)

व्यभिचार और बलात्कार: आपने शायद किसी का बलात्कार नहीं किया होगा, लेकिन यदि आपने कभी अश्लील वीडियो देखे हैं या किसी आदमी या औरत पर बुरी नज़र डालकर समलैंगिक या विपरीतलिंगी वासना से भर गए हैं तो मन में ही आप व्यभिचार कर चुके  ; अपनी आँखों से ही बलात्कार कर चुके. अश्लील वीडियो बनाने और देखने में और भी पाप सलंग्न हैं. अश्लील वीडियो बनाने वाले मानव तस्करी में लिप्त होतें हैं और स्त्रियों और बच्चों पर ड्रग्स देकर यौन अत्याचार करते हैं. आप मानव तस्करी और यौन अत्याचार के पाप में भी परोक्ष रूप से लिप्त हो गए.  (निर्गमन 20 :14 , मत्ती 5 :27 -28 , 1 कुरिन्थियों 6 :10, व्यवस्थाविवरण 22 :25 )

सृष्टि उपासना: परमेश्वर के कुछ गुण है. वो एक है, वो आत्मा है, उसकी कोई शुरुआत नहीं और अंत नहीं, वो सृष्टिकार है, उसकी तुलना इस दुनिया में किसी से भी नहीं की जा सकती.. यदि हमने कसी को भी चाहे वो माता पिता, पति, प्रेमी, प्रेमिका, पादरी, संत, पेड़, पहाड़, नदी खलिहान, चाँद- सूरज, जानवर, मूर्ती चाहे वो यीशु मसीह की ही हो, की उपासना की है तो आप सृष्टि-उपासक बन गए.  (निर्गमन 20 :2 -5, रोमियों 1 :23  & 25 )

अब आपको ज्ञात हो ही गया होगा की हम मनुष्य कितने पापी हैं. बाइबिल के अनुसार पाप की सजा है नरक में अनंत काल तक तड़पना. नरक एक भयावह जगह है जहाँ से कभी कोई वापस नहीं आ सकता. हम मनुष्यों के पास पापों की क्षमा और नरक से बचने का कोई उपाय नहीं है . आप शायद अभी यह कहेंगे की हमने अच्छे कर्म भी तो किये हैं, परन्तु बाइबिल के अनुसार परमेश्वर इतना पवित्र है कि उसके सामने हमारे धार्मिक से धार्मिक और महान से महान कार्य  मैले चिथड़े  कपड़ों के सामान हैं (यशायाह 64 :6 ).

अच्छे कर्म हमे करने चाहिए लेकिन वे परमेश्वर के महान मानकों पर कभी खरे नहीं उतर सकते. आप में से कुछ लोग शायद यह भी सोंच रहे होंगे कि परमेश्वर तो अच्छा है, वो हमे माफ़ कर देगा और अनंत काल तक तड़पने के लिए नरक में नहीं डालेगा. मैं आपको एक उदहारण देता हूँ. यदि कोई हत्यारा या बलात्कारी न्यायाधीश से कहे, “आप तो अच्छे हैं मुझे माफ़ कर दीजिये”, तो क्या न्यायाधीश उसे माफ़ कर देंगे? नहीं. वो न्यायाधीश कहेंगे, “हाँ मैं अच्छा हूँ; में भ्रष्ट नहीं और इसलिए तुमको फांसी के तख़्त पर चढ़ाने का आदेश दूंगा”. जब धरती का ईमानदार  न्यायाधीश किसी को नहीं छोड़ेगा तो क्या आप को लगता है कि स्वर्ग का न्यायाधीश परमेश्वर आपको छोड़ देगा? (भजन संहिता 9 :8 ) नहीं.

उपर्युक्त उल्लेख से आप जान गए होंगे कि आप धार्मिक रूप से कंगाल हैं और  अपने कर्मों के बल पर स्वर्ग में प्रवेश नहीं कर सकते, परन्तु खुश खबरी यह है कि दया के धनी परमेश्वर ने खुद ही आपके पाप क्षमा करने और आपको स्वर्ग ले जा कर अनंत जीवन देने का इंतज़ाम किया है. उसने अपने बेटे यीशु मसीह को पृथ्वी पर भेजा ताकि वो आप के पापों को अपने सिर लेले और आपको बचाने के लिए खुद क्रूस पर कुर्बान हो जाये. यीशु मसीह दो हज़ार साल पहले चमत्कारिक रूप से एक कुंवारी  स्त्री से पैदा हुआ, अंधों को आँखें दी , कोड़ियों को शुद्ध किया, मुर्दों को जिलाया, पानी पर चला, तूफान को शांत किया, परमेश्वर, नरक, स्वर्ग, दुनिया के अंत आदि के बारे में शिक्षाएं दीं, एक पूरी तरह से सिद्ध जीवन जिया और अपने कहे अनुसार क्रूस पर मरा, गाड़ा गया और अपने कहे अनुसार तीसरे दिन कब्र में से जी उठा , चालीस दिन तक मनुष्यों के बीच में रहा और चालींसवें दिन आसमान में जा कर अद्रश्य हो गया.

अब आपको समझ आ गया होगा की यीशु मसीह क्यों पैदा हुआ. जी हाँ, आप बिल्कुल सही समझे. यीशु मसीह पृथ्वी पर आपके स्थान पर सिद्ध जीवन जीने और सिद्ध बलिदान बनने के लिए आया था ताकि आपको पाप कि गुलामी से आज़ादी मिल सके, आपके पाप क्षमा हो सके और आप अनंत जीवन पा सके. अब इस महिमावान सुसमाचार के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए? विश्वास और पश्चाताप . जी हाँ क्रिसमस मनाने कि सार्थकता इसी में हैं कि आप यीशु मसीह की कुर्बानी के आधार पर अपने पापों कि क्षमा पाएं और उन पर विजय हो जाएँ और शेष जीवन बाइबल कि पवित्र शिक्षाओं पर चलते हुए अपने उद्धारकर्ता यीशु मसीह के लिए जीएं क्योंकि:

परमेशवर ने जगत से (आप से) ऐसा प्रेम किया कि अपना इकलौता बेटा यीशु मसीह कुर्बान कर दिया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वो नरक में अपने पांपों के कारण अनंतकाल तक ना जले पर अनंत जीवन पाए.” (यहुन्ना 3 :16 )

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