हिंदी बाइबिल अध्ययन

आत्मिक जीवन (Christian Living)

असली विश्वासी के चार चिन्ह

बाइबल हम को आदेश देती है कि हम अपने आप को परखें कि कहीं  हम नकली विश्वासी तो नहीं : अपने आप को परखो कि विश्‍वास में हो कि नहीं। (2 कुरिन्थियों 13:5) असली विश्वासी के कई चिन्ह होते हैं।  आज के भक्ति सन्देश में हम उनमे से चार पर दृष्टि करेंगे : 1) यीशु …

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क्या आप फरीसियों से अधिक दान देकर स्वर्ग में प्रवेश करेंगे? 

क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि यदि तुम्हारी धार्मिकता शास्त्रियों और फरीसियों की धार्मिकता से बढ़कर न हो, तो तुम स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश करने न पाओगे।  (मत्ती 5:20)  कई झूठे लालची पास्टर इस आयत को देकर सिखाते हैं कि देखो तुम लोगों को अपनी आमदनी का दस प्रतिशत तो चर्च में …

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क्या परमेश्वर हमें सहने से बाहर दुःख नहीं देगा?

जब किसी विश्वासी पर कोई विपत्ति या दुख आता है, तो साथी विश्वासी लोग कहने लग जाते हैं, “परमेश्वर आपकी सहनशक्ति से अधिक नहीं देगा।” “ही विल नॉट गिव यू मोर दैन यू कैन हैंडल।”   यह बहुत ही लोकप्रिय तरीका है दुःख या विपत्तिग्रस्त व्यक्ति को सांत्वना देने का। लेकिन सम्पूर्ण इतिहास गवाह है कि …

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जीवित आशा

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्‍वर और पिता का धन्यवाद हो, जिसने यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया (1 पतरस 1:3)  हम पाप के कारण गिरे हुए और शापित संसार में रहते हैं। ये संसार अँधियारा है।  यहाँ …

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बैपटिस्ट विश्वास अंगीकार अध्याय 16 – अच्छे कार्य

पैराग्राफ़ -1 (i)  केवल वे ही अच्छे कार्य हैं, जिनकी आज्ञा परमेश्वर ने अपने पवित्र वचन में दी है। (ii) जिन कार्यों का आधार यह नहीं है, वे लोगों द्वारा अंध-उत्साह में या अच्छे इरादों के दिखावे में किए जाते हैं और वास्तव में अच्छे नहीं हैं। (i) मीका 6:8; इब्रानियों 13:21  (ii) मत्ती 15:9; …

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यीशु के पास क्यों आएं? (मसीहियत में आने के गलत और सही कारण)

मसीहियत में आने के गलत कारण   चंगाई के लिए समृद्धि और आशीषों के लिए अच्छा जीवन जीने के लिए सम्मान और स्टेटस पाने के लिए जो आपको अपने समाज में नहीं मिला विवाह के लिए आपके बच्चों के लिए शैक्षिक अवसरों के लिए अच्छा महसूस करने के लिए अपने विवेक को शांत करने के …

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मनुष्य का मुख्य उद्देश्य क्या है? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-1)

1. मनुष्य का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: मनुष्य का मुख्य उद्देश्य सदा के लिए परमेश्वर की महिमा करना और उसमे आनंदित रहना है। (1 कुरिन्थियों 10:31; भजन 73:25-26) साक्षी आयतें: इसलिये तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो। (1 कुरिन्थियों 10:31) स्वर्ग में मेरा …

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विजयी आत्मिक जीवन (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 20) (Weekly Doctrinal Devotional-20)

मसीही जवान सालों-साल एक ही प्रश्न अलग अलग शब्दों में पूछते रहते हैं: मैं आत्मिक रूप से कैसे बढूं? मैं पाप पर विजय कैसे प्राप्त करूँ? मैं प्रभु को प्रसन्न करने वाला जीवन कैसे जीऊं? मैं काम-वासना/पोर्नोग्राफी/हस्थमैथुन पर विजय कैसे पाऊं? मैं आत्मनियंत्रण कैसे करूँ ? मैं पवित्र कैसे बनु?   वो इन प्रश्नों के …

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प्रभु यीशु मसीह हमारा सब कुछ और अनंत और भी साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 19 (Weekly Doctrinal Devotional-19)

आज के भक्ति सन्देश में मैं आपका ध्यान इस ओर खींचना चाहता हूँ कि महिमावान प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए क्या-क्या है। 1) प्रभु यीशु मसीह हमारा परमेश्वर है। और उस धन्य आशा की अर्थात् अपने महान् परमेश्‍वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें। (तीतुस 2:13) परन्तु पुत्र …

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विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराना (Justification by Faith) साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 18 (Weekly Doctrinal Devotional-18)

इसलिये हम क्या कहें हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्या प्राप्‍त हुआ? क्योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्ड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्‍वर के निकट नहीं। पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया ।” काम करनेवाले की …

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