हिंदी बाइबिल अध्ययन

आत्मिक जीवन (Christian Living)

acceptable giving

ग्रहण योग्य दान !

जब भी कोई धनी व्यक्ति गरीबों की मदद करने के लिए किसी संस्था का निर्माण करता है तो समाज के लोग जरूर उस पर ध्यान देते है और ऐसा व्यक्ति अपने दयावान होने और जरूरतमंदो को देने की वजह से बहुत प्रशंसा पाता है। और ज्यादातर लोग ये ही दिखाना चाहते है कि वो कितने …

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self realisation

आत्म साक्षात्कार

आप एक अद्वितीय मनुष्य हैं। आप विशेष हैं। आपके जैसा इस दुनिया में कोई नहीं। आपके अंदर अच्छाई और महानता भरी पड़ी है। हर मनुष्य आवश्यक रूप से अच्छा होता है। आपके अंदर देवत्त्व वास करता है। आपको अपने आपको जगाना है। आप को अपने अंदर ईश्वर को खोजना है। आपको अपनी महानता को बाहर …

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theology and prayer

ARMINIANS’ INCONSISTENT THEOLOGY AND PRAYER

Some People’s Theology: God did not predestine us to be saved; we have a part in it. Christ has done all that He had to do. We use our free will to come to Christ. It’s we who come to Christ by exercising our free will. Their Prayer No 1: They pray like this, “God …

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परमेश्वर का नाम व्यर्थ में लेना क्या होता है?

तीसरी आज्ञा कहती है: “तू अपने प्रभु परमेश्वर का नाम व्यर्थ ना लेना. जो कोई उसका नाम व्यर्थ लेगा उसे वो किसी रीती से निर्दोष नहीं ठहराएगा.” परमेश्वर का नाम व्यर्थ लेने का अर्थ क्या है? मूल भाषा में “लेने” के लिए जो शब्द इस्तेमाल किया गया है वो है “नासा”. जिसका अर्थ सिर्फ “लेना” …

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आइये आत्मिक तमीज सींखे

आइये आत्मिक तमीज सींखे

बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के सामने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है,  इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों॥ (सभोपदेशक 5:2) तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष …

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