फिर मिलने की जीवंत आशा- हेरल्ड जोसफ को एक ट्रिब्यूट


मेरे ससुर, हेरल्ड जोसफ को प्रभु के पास गए एक महीने से ज्यादा हो गया। वो कोविड-19  से ग्रसित थे। 4  दिसंबर की शाम को मुझे और मेरी पत्नी को यह कहकर हॉस्पिटल बुलाया गया कि पापा बहुत ही गंभीर अवस्था में है।  हम दोनों कांपते हुए लेकिन प्रभु में शांत हृदयों के साथ हॉस्पिटल गए।  हम पी पी ई किट पहन ही रहे थे की हमे बताया गया की पापा अब नहीं रहे। मेरी पत्नी स्तब्ध रह गई, मम्मी रो रही थी और मैं गला फाड़ कर प्रभु यीशु मसीह का नाम पुकार उठा।

जब हॉस्पिटल की औपचारिकताएं पूरी की  जा रही थी तब मैं पापा के साथ बिताए समय और उनके व्यक्तित्तव के बारे में सोचने लगा।  मैं पापा को सिर्फ 6 सालों से जनता था, लेकिन उनके जीवन ने मुझ पर एक अमिट छाप छोड़ दी।  वो पेशे से एक पासवान या प्रचारक नहीं थे, लेकिन उनका जीवन चीख चीख कर पवित्र आत्मा के फलों ( प्रेम, प्रसन्नता, शांति, धीरज, दयालुता, नेकी, विश्वास, नम्रता और आत्म-संयम: गलातियों 5:22) का प्रचार करता था। मैं उनके प्रति विशेष रूप से इसलिए आभार महसूस कर रहा था क्योंकि उन्होंने अपने दिल के टुकड़े स्वर्णिमा जैसी धर्मी स्त्री का हाथ मेरे हाथ में दिया था। वो 2020 का क्रिसमस मनाने के लिए हमारे साथ नहीं रहे और नाही 28 दिसंबर को स्वर्णिमा और मुझे अपने आशीषित वैवाहिक जीवन के 5 साल पूरे करते देख पाए।  वो हमारे बेटे किअन को बहुत ज्यादा प्यार करते थे और उस दो साल से कम के बच्चे को भी उनके प्रेम और व्यक्तित्व ने अत्यंत प्रभावित किया था । पापा किअन के दुसरे जन्मदिन 26 मार्च 2021 को भी हमारे साथ नहीं होंगे।  परन्तु उनकी यादों के द्वारा हम हमेशा आशीषित होते रहेंगे :

“धर्मी का स्मरण धन्य है।” (नीतिवचन 10 :7)

पापा कोई प्रसिद्ध व्यक्ति नहीं थे। वो मसीह कि देह और अपने परिवार से प्यार करने वाले साधारण और असिद्ध (imperfect) व्यक्ति थे। फिर भी उनके जीवन का हम पर इतना प्रभाव छोड़ना इस बात का सबूत है कि प्रभु यीशु में विनम्रता और दीनता से जिया गया अप्रसिद्ध, असिद्ध (imperfect) और साधारण जीवन देखने वालों पर कितना असाधारण (extraordinary) प्रभाव छोड़ सकता है। मुझे पॉल वॉशर के शब्द याद आ रहें हैं:

“क्या आप दुनिया को बदलना चाहते हैं? जाओ और अपने परिवार से प्यार करो।”

हॉस्पिटल की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, हम पापा के निष्प्राण शरीर को घर लाये और अगले दिन प्रार्थना और धन्यवाद के साथ उन्हें मिटटी के हवाले कर दिया।  कितना दुखदाई और हृदयविदारक था अपने पिता जिनसे हम प्रेम करते थे, जिनको छूते थे , गले लगाते थे, चूमते थे; जिनके साथ बातें करते थे, मजाक करते थे, हँसते थे, खाना खाते थे, बाइबल अध्ययन करते थे, प्रार्थना करते थे- उनको- उन्ही पिता को अपने हाथों से मिटटी में गाड़ आना। लेकिन क्या हमारी कहानी और अपने प्रिय पिता के साथ हमारी सहभागिता कब्रिस्तान में उन्हें गाड़ने के बाद खत्म हो गई ? नहीं? बिलकुल भी नहीं। पवित्र शास्त्र बाइबल के अनुसार हम यदि प्रभु यीशु मसीह के दुबारा आने से पहले मर जाते हैं, तो हमारा शरीर कब्र में सोयेगा और हमारे आत्मा स्वर्ग जाकर पापा से मिलेंगे:

और मैं तो उसके पास जाऊंगा, परन्तु वह मेरे पास लौट न आएगा। – (दाऊद, 2 शमूएल 12:23)

और यदि हमारे जीते जी प्रभु यीशु मसीह वापस आ गए तो, वो पापा के आत्मा को लेकर आएंगे और पापा का शरीर भी जिला दिया जायेगा। ये जिलाया हुआ शरीर महिमावान होगा जो कि फिर कभी नहीं मरेगा।  परमेश्वर पापा के आत्मा को उनके शरीर से फिर मिला देगा। और हम जो जिन्दा है बादलों पर उठा लिए जाएंगे ।  हमारे नश्वर शरीर भी महिमावान शरीर में बदल जाएंगे। तदुपरांत, हम सब साथ में प्रभु यीशु मसीह कि अनंत धन्य और सुखद उपस्थिति में सदा रहेंगे।

हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाईं शोक करो जिन्हें आशा नहीं।

क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।

क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।

क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।

तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। (1 थेस्सलुनीकियों 4:13-16)

प्रशंसा-स्तुति और धन्यवाद हो जीवित और सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह का जिसने हमे ऐसी महान आशा दी और कहा:

पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।

और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेग।  (यहुन्ना 11:25-26)

क्या जो मैंने ऊपर बताया ऐसा सभी के साथ होगा।  नहीं ? क्या ऐसा सभी ईसाईयों  के साथ होगा। नही।  ये महिमावान भाग्य सिर्फ उनका है जो ये विश्वास करते हैं कि प्रभु यीशु मसीह उनके पापों की क्षमा के लिए मरा और तीसरे दिन जी उठा और फिर से उन्हें लेने और दुनिया का न्याय करने के लिए आने वाला है और जो अपना जीवन प्रभु यीशु मसीह की महिमा के लिए जीता है।  जो लोग ये विश्वास नहीं करते की यीशु मसीह ही एक मात्र प्रभु और उद्धारकर्ता है, उनका भी पुनुरुत्थान होगा, लेकिन उनके शरीर और आत्मा अनंत काल तक नरक में जलाये जाएंगे। ये दूसरी और अनंत मृत्यु है। वो लोग नरक में अनंत काल तक तड़पते रहेंगे अपने पापों के कारण:

डरपोकों, और अविश्वासियों (जो यीशु मसीह पर एक मात्र उद्धारकर्ता और प्रभु के रूप में विश्वास नहीं करते और उसके चरणों में अपना जीवन समर्पित नहीं करते), और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है॥ (प्रकाशितवाक्य 21:8)

और उन की पीड़ा का धुआं युगानुयुग उठता रहेगा…………… उन को रात दिन चैन न मिलेगा। (प्रकाशितवाक्य 14:11)

यदि आप उनमें से हैं जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं करते तो मैं आपको आमंत्रित करता हूँ की आइये, अपने पापों से पश्चाताप करिये, यीशु मसीह पर विश्वास करिये की वह आपकी पापों की क्षमा के लिए मरा और तीसरे दिन जी उठा और वापस दुनिया का न्याय करने को आने वाला है:

यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। (रोमियों 10:9)

2 thoughts on “फिर मिलने की जीवंत आशा- हेरल्ड जोसफ को एक ट्रिब्यूट”

  1. कालिंदी says:

    हां जो भी कहा आपने यह सही है बाइबल में लिखा है कि जो प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं उन्हें फिर से जीलाया जाएगा और वह परमेश्वर के साथ जाएंगे और उसकी महिमा करेंगे अनंत काल तक पुलिस ने कहा है प्रभु में आनंद रहो मैं फिर से प्रभु में आनंद रहो हां हमारी आशा प्रभु यीशु मसीह

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