प्रश्न : “तौभी बच्चे जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी, यदि वे संयम सहित विश्वास, प्रेम, और पवित्रता में स्थिर रहें॥” ( 1 तीमुथियुस 2:15) इस आयत का मतलब क्या है? क्या स्त्रियां वास्तव मे बच्चा जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी?


उत्तर: नहीं. असंभव. हम जानते हैं की उद्धार बच्चे जन्माने (इफिसियों 2:6-9) के दवारा नहीं होता  बल्कि पवित्र आत्मा से जन्मने के दवारा होता है (यूहन्ना 3:5).

1 तीमुथियुस 2:15 एक कठिन आयत है. ऐसी कठिन आयतों की व्याख्या करने के लिए हमे तीन  बातें ध्यान रखनी चाहिए. पहली की सम्पूर्ण बाइबिल इस बारे में क्या कहती हैं. दूसरी की इस पद का सन्दर्भ क्या हैं. तीसरी की हमें अपनी ही व्याख्या पर अडिग  नहीं हो जाना चहिये. हम जानते हैं की सम्पूर्ण बाइबिल कहती हैं की उद्धार सिर्फ अनुग्रह से होता हैं  और इस पद का सन्दर्भ जनने के लिए हम इन सब पंक्तियों को पड़ेंगे:

 “वैसे ही स्त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से।

 क्योंकि परमेश्वर की भक्ति ग्रहण करने वाली स्त्रियों को यही उचित भी है।

और स्त्री को चुपचाप पूरी आधीनता में सीखना चाहिए।

और मैं कहता हूं, कि स्त्री उपदेश करे, और पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप रहे।

क्योंकि आदम पहिले, उसके बाद हव्वा बनाई गई।

और आदम बहकाया गया, पर स्त्री बहकाने में आकर अपराधिनी हुई।

 तौभी बच्चे जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी, यदि वे संयम सहित विश्वास, प्रेम, और पवित्रता में स्थिर रहें॥”  (1तिमुथियस 2:9-15)

इस सन्दर्भ में  पौलुस स्त्रियों को निर्देश दे रहा हैं की वे  संयम, विश्वास, पवित्रता , प्रेम आदि से सुसज्जित  और  पुरुष के अधीन रहे; कलीसिया की मुखिया बनने या पुरुष पर प्रभुता करने की कोशिश न करे . इसका कारण भी पौलुस ने दिया हैं. इसलिए क्योंकि पहले पुरुष सिरजा गया और स्त्री ने पहले पाप किया. ये कोई सांस्कृतिक कारण नहीं हैं बल्कि परमेश्वर के दवारा ठहराया क्रम हैं. पुरुष सिर हैं और स्त्री उसके अधीन रहेगी.

चलिए अब चलते हैं 1 तिमुथियस 2:15 की व्याख्या करने. इसका मतलब अलग अलग बाइबिल विद्वानों ने अलग अलग बताया है. हम तीन मुख्य और विश्वसनीय दृष्टिकोणों को देखेंगे:

 1. कुछ टीकाकार इस आयत को उत्पत्ति 3:15 से जोड़ कर देखते हैं जिसमे लिखा है की स्त्री का पुत्र शैतान का सर कुचलेगा और मानव जाती को उद्धार देगा. इन टीकाकारों का कहना है की स्त्री (मूलतः हव्वा) पर अपने पति (आदम) की अधीनता छोड़ कर स्वतंत्र रूप से अपने निर्णय लेने का पाप या कलंक था. भलाई और बुराई के ज्ञान के फल के बारे में पति से पाए निर्देश की उसने उपेक्षा की और उसकी अधीनता में रहकर उसकी बात मानने के बजाय स्वतंत्र रूप से कार्य किया, पर वो हव्वा (स्त्री)  इस पाप और कलंक से पुत्र (यीशु मसीह) जनने के दवारा उद्धार पायेगी. कहने का अर्थ हैं की उत्पत्ति 3:15 पूरा हो जाने के कारण स्त्रियां अपने पांपों से उद्धार पाएंगी.

2. कुछ विद्वानों के अनुसार बच्चा जनना यहाँ अक्षरक्षः नहीं ले सकते. यहाँ गुणोक्ती या लक्षणोक्ति अलंकार (metonymy) हैं. इस अलंकार में एक शब्द अपना अक्षरक्षः अर्थ नहीं देकर अपने से सम्बंधित कोई और अर्थ देता हैं, जैसे कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली हैं. यहाँ कलम का मतलब प्लास्टिक की कलम नहीं है. प्लास्टिक की कलम अक्षरक्षः तलवार से ज्यादा शक्तिशाली नहीं हो सकती. यहाँ कलम का मतलब हैं लिखा हुआ शब्द या किताबें. इसी तरह 1 तीमुथियुस 2:15 में  ”बच्चे जन्म”  देने का मतलब बच्चे पैदा करना नहीं हैं बल्कि बच्चे जन्मना वहां गुणोक्ती अलंकार हैं और परमेश्वर के लिए धर्मी बच्चे बड़े करने, उनको शिक्षा देने, पति के अधीन रहने , घर का अच्छा  प्रबंधन करने जैसे सम्पूर्ण कर्तव्यों को अपने अंदर समाहित कर लेता है. इस हिसाब से सही सन्दर्भ में इस पद का मतलब होगा की स्त्री घर की और चर्च की मुखिया बनने  की कोशिश करना छोड़ (1 तिमुथियस 2:11-12) कर परमेश्वर दवारा दिए गए अपने सम्पूर्ण कर्तव्यों को करने के दवारा उद्धार पायेगी. परन्तु यहाँ भी एक समस्या आ गई. क्या स्त्री अपने दायित्वों का सही निर्वहन करने अर्थात कर्मों के दवारा उद्धार पायेगी?  नहीं, कदापि नहीं. क्योंकि उद्धार तो सिर्फ अनुग्रह से होता हैं. फिर? ये सिर्फ बात को कहने का तरीका हैं. जैसे मति 5:44-45 मे लिखा हैं की यदि तुम अपने दुश्मनो से प्रेम करो और उनके लिए प्रार्थना  करो तो स्वर्गीय पिता की संतान ठहरोगे .

क्या कोई कर्मो के दवारा स्वर्गीय पिता की संतान ठहरता हैं. नहीं, स्वर्गीय पिता की संतान पवित्र आत्मा से जन्मने के दवारा बनते हैं . कहने का मतलब हैं की जो उद्धार पाया हैं और स्वर्गीया पिता की संतान हैं उसमे ये चिन्ह होंगे – वे अपने दुश्मनो से प्रेम करेंगे और उनके लिए प्रार्थना  करेंगे. 1 तिमुथियस 4:16 में लिखा हैं की यदि तिमुथियस अपना चल चलन अच्छा रखेगा और सही शिक्षा में बना रहेगा तो अपना और अपने सुनने वालों का उद्धार करवाएगा. इस आयत में भी इसका मतलब ये नहीं की तिमुथियस अच्छे चाल चलन और सही शिक्षा के दवारा उद्धार पायेगा, परन्तु यह की सच्चे विश्वासी में अच्छा चल चलन और सही शिक्षा के चिन्ह होते हैं. इसी प्रकार से स्त्री भी अपने दायित्वों को पूरा करने के दवारा उद्धार नहीं पाएगी बल्कि यह की यदि वो उद्धार पाई हैं तो वो पति पर और कलीसिया की मुखिया बनने की कोशिश करना (1 तिमुथियस 2:11-12) छोड़  कर अधीनता में रहेगी  और संयम , विश्वास, प्रेम, और पवित्रता उसेक जीवन में दिखेंगे.

3. कुछ और विद्वान हैं जो कहते हैं की यूनानी शब्द सोज़ो का मतलब जरुरी नहीं की उद्धार ही हो सोज़ो का मतलब  किसी विपत्ति, परेशानी आदि  से बचाना या छुड़ाना भी हो सकता हैं. मति 8:25,, 9:21-22, 24:22, 2 तिमुथियस 4:18 आदि में यही शब्द उद्धार के लिए नहीं बल्कि किसी विपत्ति  से छुड़ाने या बचाने के लिए इस्तेमाल किया गया हैं. इन विद्वानों के अनुसार सोज़ो का अर्थ यहाँ एक कलंक से छूटना हैं.  स्त्री पर मनुष्य जाती को पाप में ले जाने का माध्यम बनने और  पहले पाप करने (1 तिमुथियस 2:14) का कलंक हैं और उस कलंक से वो छूट सकती हैं या बच सकती हैं – परमेश्वर के लिए धर्मी बच्चों को बड़ा करने और संयम, विश्वास, प्रेम और पवित्रता में स्थिर रह कर.

1 thought on “प्रश्न : “तौभी बच्चे जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी, यदि वे संयम सहित विश्वास, प्रेम, और पवित्रता में स्थिर रहें॥” ( 1 तीमुथियुस 2:15) इस आयत का मतलब क्या है? क्या स्त्रियां वास्तव मे बच्चा जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी?”

  1. Durgesh says:

    Sar ismein Bible ki ayat ko padhna hai kya

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