यीशु मसीह परमेश्वर है।साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -4)


आपका अनंत जीवन इसी पर निर्भर करता है कि आप यीशु मसीह को क्या मानते हैं। यदि आप यीशु मसीह को सिर्फ एक गुरु या नबी मानते हैं तो आप नरक में जा रहें हैं। उद्धार पाने के लिए यह ज़रूरी है कि आप प्रभु यीशु मसीह को परमेश्वर का अनादि बेटा और परमेश्वर माने :

और अनन्त जीवन यह है कि वे तुझ एकमात्र सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जानें। जो कार्य तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा करके मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है। अब हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत की सृष्टि से पहले, मेरी तेरे साथ थी। (यूहन्ना 17:3-4)

आपने ऊपर दी गई आयत में देखा कि यीशु मसीह सिर्फ एक मनुष्य नहीं लेकिन शरीर धारण करके आया हुआ परमेश्वर है।  वह जगत की उत्पत्ति से पहले से परमेश्वर के साथ महिमा में था। आइये यीशु मसीह के परमेश्वरत्व के बारे में और आयतों पर मनन करें :

आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। यही आदि में परमेश्वर के साथ था। सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ, और जो कुछ उत्पन्न हुआ है उसमें से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न नहीं हुई।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

(यूहन्ना 11-3, 14)

उत्पत्ति 1:1 में हम देखते हैं कि आदि में परमेश्वर ने आसमान और धरती की रचना की। इसका अर्थ है कि परमेश्वर आदि से अर्थात जगत की शुरआत से पहले अस्तित्त्व में था।  वही वाक्यांश यहुन्ना ने यहुन्ना 1:1 में इस्तेमाल किया।  यहुन्ना कह रहा है की जगत की शुरुआत से पहले वचन था और वो वचन परमेश्वर के साथ था और फिर वो वचन शरीर धारण कर के आ गया जिसे हम यीशु मसीह के रूप में जानते हैं।

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, कि पहले इसके कि अब्राहम उत्पन्न हुआ, मैं हूँ।तब उन्होंने उसे मारने के लिये पत्थर उठाए। (यूहन्ना 8:58-59)

इस आयत की तुलना निम्न आयतों से कीजिये:

मूसा ने परमेश्वर से कहा, “जब मैं इस्राएलियों के पास जाकर उनसे कहूँ, ‘तुम्हारे पितरों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है,’ तब यदि वे मुझ से पूछें, ‘उसका क्या नाम है?’ तब मैं उनको क्या बताऊँ?” परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूँ सो हूँ।फिर उसने कहा, “तू इस्राएलियों से यह कहना, ‘जिसका नाम मैं हूँ है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा हैं। (निर्गमन  3:13-14)

यीशु मसीह जब यूहन्ना में कह रहें हैं की अब्राहम के पहले से मैं हूँ तो उनका मतलब हैं मैं जो हूँ सो हूँ अर्थात मैं स्वयंभू (जिसे अस्तित्व के लिए किसी और की आवश्यकता नहीं जो अनादी काल से स्वयं की सामर्थ से अस्तित्त्व में है) परमेश्वर यहोवा हूँ। यीशु मसीह ने अपने आप को यहोवा परमेश्वर बोला। आइए और आयतें देखते हैं :

फिलिप्पुस ने उससे कहा, “हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे, यही हमारे लिये बहुत है।यीशु ने उससे कहा, “हे फिलिप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? (यूहन्ना 14:8-9)

मैं और पिता एक हैं। (यूहन्ना  10:30)

परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में है, उसी ने उसे प्रगट किया। (यूहन्ना 1:18)

यीशु मसीह यूहन्ना 10:30 में जब कहता है कि मैं और मेरा पिता एक है तो उसका मतलब यह नहीं कि वही पिता भी है और पुत्र भी है। उसका मतलब है कि हम दोनों अस्तित्त्व में एक हैं, हम दो व्यक्ति हैं परन्तु दोनों मिलकर एक परमेश्वर हैं।  इसीलिए फिलिप्पुस ने जब यीशु मसीह को देखा तो परमेश्वर को देख लिया।

हम इन सब आयतों से निम्नांकित निष्कर्ष निकालेंगे :

  • यीशु मसीह परमेश्वर है। (यूहन्ना 8:58-59)
  • यीशु मसीह परमेश्वर का अनादी बेटा है। (यूहन्ना 1:18)
  • यीशु मसीह पिता परमेश्वर के साथ अनादि काल से सह अस्तित्त्व में है। (यूहन्ना 17:3-4; 1:1-3)
  • यीशु मसीह पिता परमेश्वर के साथ इस जगत का सृष्टिकर्ता है। (यूहन्ना 1:1-3)
  • यीशु मसीह ही परमेश्वर का प्रकटीकरण है। (यूहन्ना 14:8-9; 1:18)
  • यीशु मसीह शरीर धारण करके पृथ्वी पर आया। (यूहन्ना 1:1-3, 14)
  • उसके बिना परमेश्वर को जानना असंभव है। (यूहन्ना 1:18)
  • यीशु मसीह को माने बिना कोई उद्धार नहीं पा सकता। (यूहन्ना 17:3-4)

प्रोत्साहन : सम्पूर्ण बाइबल मसीह केंद्रित है। आज के भक्ति सन्देश में हमने बाइबलीय सबूत देखे यीशु मसीह के परमेश्वर, परमेश्वर का बेटा और उद्धारकर्ता होने के। तो आईये हम यीशु मसीह कि आराधना करें। उस पर विशवास करें। उसके पीछे चलें। उसके लिए जिएं। क्योंकि वही है इस सृष्टि का केंद्र।

प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह हम सब के साथ होता रहे।

उदाहरण प्रार्थना : है पिता परमेश्वर आपका धन्यवाद हम नीच पापियों के उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह को भेजने के लिए। आपका धन्यवाद आज आपने मुझे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वरत्व के बारे में सिखाया। मुझ पर अनुग्रह कीजिये कि मैं आपके बेटे और हमारे परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह को अपना खजाना मानू, उसे रोज आपने दिल में संजोऊँ, उस पर मन लगाऊं, उससे प्यार करूँ।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional): मसीह विज्ञान अर्थात मसीह का अध्ययन (Christology: Doctrine of Christ)

अधिक अध्ययन करने के लिए:

  • Jesus is God by Paul Washer:

https://www.youtube.com/watch?v=aLEl9Pe1ghs

  • Who do you say Jesus is? by Paul Washer:

https://www.youtube.com/watch?v=BBfcnp0dcKM

  • Is Jesus God or like God by John Piper:

https://www.desiringgod.org/labs/is-jesus-like-god-or-god

  • Before Time Began Jesus was by John Piper:

https://www.desiringgod.org/messages/in-the-beginning-was-the-word/excerpts/before-time-began-jesus-was

  • The Master’s Seminary on Christ’s Deity:

https://blog.tms.edu/11-reasons-affirm-deity-christ

 

 

3 thoughts on “यीशु मसीह परमेश्वर है।साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -4)”

  1. Durgesh says:

    Bahut achcha god bless you

  2. Seema says:

    ?? thank you

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