विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराना (Justification by Faith) साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 18 (Weekly Doctrinal Devotional-18)


इसलिये हम क्या कहें हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्या प्राप्‍त हुआ? क्योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्ड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्‍वर के निकट नहीं। पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया ।” काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्‍क समझा जाता है। परन्तु जो काम नहीं करता वरन् भक्‍तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्‍वास करता है, उसका विश्‍वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है। जिसे परमेश्‍वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है :
“धन्य हैं वे जिनके अधर्म क्षमा हुए,
और जिनके पाप ढाँपे गए।
धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्‍वर पापी न
ठहराए।”
(रोमियों 4:1-8)

विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराने की शिक्षा सच्चे सुसमाचार का केंद्र है। विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराना वाक्यांश एक वैद्यानिक या कानूनी शब्द है। इसका अर्थ होता है कि जब हम कर्मों से उद्धार पाने की कोशिश छोड़ कर यीशु मसीह में विश्वास करते हैं तो परमेश्वर अपनी अदालत में हमारे पापों को क्षमा कर देता है, हमें निरपराध ठहरा देता है, दोषमुक्त कर देता है, धर्मी ठहरा देता है। धर्मी ठहराने में परमेश्वर हमें सिर्फ ऐसे नहीं देखता जैसे हमने कभी कोई पाप किया ही ना हो, बल्कि ऐसे भी देखता है जैसे यीशु मसीह के किये हुए सपूर्ण सिद्ध कर्म हमने किये हों। ऐसा कैसे संभव हुआ ? यीशु मसीह की कुर्बानी के द्वारा। परमेश्वर ने क्रूस पर लटके निर्दोष यीशु मसीह पर हमारे सारे पाप डाल दिए और उसको हमारे बजाय का दंड दे दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि हम जो यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं, परमेश्वर उन पर यीशु मसीह की धार्मिकता डाल देता है।

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेश्‍वर की धार्मिकता बन जाएँ। (2 कुरिन्थियों  5:21)

यह सत्य समझने के साथ साथ हमें यह भी समझना है कि विश्वास यीशु मसीह के द्वारा क्रूस पर पूरे किये उद्धार के काम में कुछ जोड़ता नहीं। विश्वास के द्वारा हम अपने पापों की क्षमा को, दोषमुक्ति को, उद्धार को ग्रहण करते हैं और यह विश्वास हममे परमेश्वर उत्पन्न करता है (प्रेरितों 3:16; 13:48)।

प्रोत्साहन : यीशु मसीह परमेश्वर का निष्पाप मेमना हमारे खातिर कुर्बान हुआ। क्या ये बात आप के ह्रदय में हलचल नहीं पैदा करती ? उस पर आपके पाप डाल दिए गए और वो आप के पापों के कारण पिता परमेश्वर के द्वारा कुचला गया। क्या ये बात आप को अपने पाप से नफरत करने के लिए बाध्य नहीं करती ? वो क्रूस पर मरकर आपकी धार्मिकता बन गया। क्या ये बात आपको धन्यवाद और आराधना से नहीं भरती? यदि आपने उद्धार पाया है, तो जरूर आपका आत्मा यीशु मसीह के क्रूस की और देख कर रोता होगा और आपको उसके लिए जीने के लिए बाध्य करता होगा।

उदहारण प्रार्थना : है पिता परमेश्वर आपका धन्यवाद आपके बेटे यीशु मसीह के जीवन और उसकी कुर्बानी के लिए। वो मुझ जैसे नीच पापी के लिए मरा ! है पिता मुझे उसके लिए जीने में मदद कीजिये।
आपके बेटे यीशु मसीह के नाम से।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional):
धर्मी ठहराने की शिक्षा; आरोपण की शिक्षा ( Doctrine of Justification; Doctrine of Imputation)

अधिक अध्ययन करने के लिए:

https://www.youtube.com/watch?v=lbYCzWVvt5c

https://www.youtube.com/watch?v=DfKUxXB7_Cg

https://www.gty.org/library/articles/A194/justification-by-faith

https://www.ligonier.org/learn/devotionals/the-doctrine-of-justification/

 

 

 

2 thoughts on “विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराना (Justification by Faith) साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 18 (Weekly Doctrinal Devotional-18)”

  1. Durgesh says:

    God bless you Prabhu aapko Apne bhakti main aur badhai

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