विजयी आत्मिक जीवन (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 20) (Weekly Doctrinal Devotional-20)


मसीही जवान सालों-साल एक ही प्रश्न अलग अलग शब्दों में पूछते रहते हैं:

  • मैं आत्मिक रूप से कैसे बढूं?
  • मैं पाप पर विजय कैसे प्राप्त करूँ?
  • मैं प्रभु को प्रसन्न करने वाला जीवन कैसे जीऊं?
  • मैं काम-वासना/पोर्नोग्राफी/हस्थमैथुन पर विजय कैसे पाऊं?
  • मैं आत्मनियंत्रण कैसे करूँ ?
  • मैं पवित्र कैसे बनु?

 

वो इन प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए ये करते हैं :

  • वे अलग अलग अगुओं  (leaders)के पास जाते हैं कि कोई उन्हें कोई राज  (secret)बता दे एक विजयी जीवन जीने का।
  • वे किसी जवानो की सभा या शिविर  (youth conference or camp)का इंतज़ार करते हैं कि वो वहां जाएंगे और आत्मिक रूप से बलवंत होकर आ जाएंगे।
  • वे किसी प्रचारक जिसे वे आत्मिक समझते हैं से प्रार्थना करवाते हैं।
  • वे अलग अलग उपदेशकों के उपदेश सुनते हैं।
  • वे हमेशा आत्मिक बढ़ोतरी पर आने वाली किताबों या लेखों की खोज में रहते हैं।

वे इन सब चीज़ों की खोज पाप से आने वाली निराशा या कुंठा (frustration) और तीव्र अपराध बोध (feeling of guilt) के बाद ज्यादा करते हैं। कहने का अर्थ है कि वो अपने पसंदीदा पाप का क्षणिक आनंद लेते हैं और उस क्षणिक आनंद के बाद कुंठा (frustration) और अपराध बोध (feeling of guilt) उन्हें जकड लेते हैं। उस निराशा से बहार आने के लिए, अपने विवेक को जो उन्हें कचोट रहा है को शांत करने के लिए और शांति पाने के लिए वे पाप पर विजय विषय पर  कुछ उपदेश (sermons/messages) सुनते हैं या लेख (articles) पढ़ते हैं। इसके बाद वो फिर से पश्चाताप कर लेते हैं, थोड़ी सी बाइबल पढ़ लेते हैं, फिर से पाप नहीं करने का दृढ़ निश्चय करते हैं और सो जाते हैं, परन्तु अगले दिन या एक दो दिन बाद फिर से उसी प्रक्रिया को दोहराते हैं : पाप करते हैं, कुंठित हो जाते हैं, दोषी महसूस करते हैं, कोई उपदेश सुनते हैं या लेख पढ़ते हैं, पश्चाताप करते हैं, थोड़ी सी बाइबल पढ़ते हैं, फिर से पाप नहीं करने का दृढ़ निश्चय करते हैं और सो जाते हैं। कभी कभी कुंठा इतनी बढ़ जाती है कि वो कई दिनों तक कोई उपदेश भी नहीं सुनते; कोई लेख भी नहीं पढ़ते, थोड़ी सी प्रार्थना-बाइबल जो वो करते हैं वो भी छोड़ देते हैं। फिर कुछ दिनों या कभी कभी एक दो सप्ताह बाद फिर से वो प्रार्थना और बाइबल की और लौटते हैं। कुछ जवान इतने समय बाद लौटने के कारण दो-तीन-चार घंटे उपदेश सुनने, लेख पढ़ने और प्रार्थना-बाइबल में लगाते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से पाप कर लेते हैं। उन्हें कोई स्थायी विजय नहीं मिलती और कभी कभी तो वो परमेश्वर पर क्रोधित हो जाते हैं और उस पर संदेह करने लग जाते हैं कि “जब परमेश्वर के पास अनंत सामर्थ है तो वो उन्हें बदल क्यों नहीं देता; क्यों उन्हें पाप में चलने देता है ?” वो ऐसे व्यहवार करते हैं जैसे परमेश्वर उनके पापों के लिए जिम्मेदार है।

ये लोग क्यों स्थायी विजय नहीं पा पाते ? क्योंकि इनमे एक महत्त्वपूर्ण आत्मिक अनुशासन की कमी है। अभी तक हमने सिर्फ समस्या पर गौर किया है। आइये अब हम इस समस्या के हल की ओर चलते हैं।

जो विश्वासी उद्धार तो पाए हैं, परन्तु दुर्भाग्य से गलत कलीसिया में पाए जाते हैं और गलत शिक्षाओं में हैं- उनके लिए मेरे पास ज्यादा आशा नहीं है, जब तक कि वे सही ओर सच्ची शिक्षा ना ले ले । क्योंकि पवित्रता सत्य के द्वारा ही संभव है:

सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर : तेरा वचन सत्य है। (यूहन्ना 17:17)

जो सही कलीसिया में और सही शिक्षाओं में है और परमेश्वर को जानते हैं, लेकिन संघर्ष कर रहें हैं, उनको मैं व्यावहारिक बाइबलीय मार्दर्शन दे सकता हूँ। जो मैं बताने जा रहा हूँ वो कोई राज नहीं है; बल्कि इतना सामान्य है कि शायद आपको विश्वास करने में मुश्किल हो।

रोज रात को जल्दी (9-9.30 बजे तक) सोएं और सुबह जल्दी (5-5.30 तक) उठ कर कम से कम डेढ़-दो घंटे बाइबल पठन-मनन-आराधना-प्रार्थना करें। जल्दी सोने और जल्दी उठने से मनुष्य स्वस्थ्य, धनी (आत्मिक रूप से तो पक्का; और कभी कभी कुछ लोगों के जीवन में परमेश्वर भौतिक रूप से भी ऐसा कर सकता है) और बुद्धिमान (आत्मिक रूप से बलवंत) बनता है। अहा ! परमेश्वर की बुद्धि और आत्मिक बढ़ोतरी- यही तो हम चाहते हैं और ये उपलब्ध है अपने जीवन में एक छोटा सा लेकिन अनंत महत्त्व का बदलाव करने के द्वारा अर्थात जल्दी सोना और जल्दी उठ कर सबसे पहले परमेश्वर को खोजना। सुबह जल्दी उठने के लिए आप को किसी विशेष अभिषेक की जरुरत नहीं हैं, बल्कि परमेश्वर के सामान्य अनुग्रह और सामन्य बुद्धि और प्रार्थना की जरुरत है। जब आप जान गए हैं कि आत्मिक बढ़ोतरी की चाबी क्या है, तो लगाइये इस चाबी को और पा लीजिये अथाह खजाना जो प्रभु यीशु मसीह में छिपे हैं। कोई मूर्ख ही होगा जो कंगाल, नंगा और भूखा है और जिसको खजाने की चाबी मालिक ने खुद ने दे दी हो और फिर भी वो उस चाबी का इस्तेमाल करके अर्थात खजाने के धन का इस्तेमाल करके अपने कंगालपन, नंगेपन और भुखमरी को दूर ना करे। (इस विषय पर मेरा एक और महत्वपूर्ण लेख पढ़ें : https://logosinhindi.com/या-तो-सुबह-जल्दी-या-कभी-नही/ )

निष्कर्ष: जी हाँ, परमेश्वर हमारा पवित्रीकरण अनुग्रह के सामान्य साधनों अर्थात नियमित रूप से सुबह सबसे पहले बाइबल पढ़ने, उस पर मनन करने, प्रार्थना करने, संगती करने, शिक्षा लेने आदि के द्वारा ही करता है। और इन सब में भी मुख्य है वचन। इसीलिए दाऊद ने कहा :

जवान अपनी चाल को
किस उपाय से शुद्ध रखे?
तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। (भजन संहिता 111:9)

मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में
रख छोड़ा है,
कि तेरे विरुद्ध पाप न करूँ। (भजन संहिता 111:11)

अपने हृदय को वचन से भरने का सबसे उत्तम और आसान समय है- सुबह जल्दी। परमेश्वर को अपने दिन में सबसे पहला स्थान दे दो, उसको वचन पर मनन के द्वारा अपनी भूख और प्यास दिखा दो और घुटनो पर गिरकर हाथ फैला कर अपने कंगालपन और पाप का अंगीकार कर लो और उससे आशीष मांग लो। फिर देखो परमेश्वर के अनुग्रह की सामर्थ। फिर आपको ऊपर दिए गए प्रश्न बार बार नहीं पूछने पढ़ेंगे।

यही है राज विजयी आत्मिक जीवन का- यदि आप इसे राज कहना चाहते हैं तो।

प्रोत्साहन :

प्रिय भाई बहन, हम कितनी भीं बार क्यों ना हारे हों अपने पाप से, लेकिन परमेश्वर हम से प्रेम करता है। हम आज भी उसमे बने हुए हैं और पवित्रता की खोज कर रहे हैं- ये सबूत है की उसने हमे कभी नहीं छोड़ा; ना ही छोड़ेगा। हमको अनुग्रह के मुख्य जरिये/साधन अर्थात वचन के द्वारा अपने विश्वास के कर्ता और उसको सिद्ध करने वाले प्रभु यीशु मसीह की ओर लगातार ताकते रहना है (इब्रानियों 12:2) और उसने हमारे अंदर जो काम शुरू किया है उसे वो पूरा भी करेगा (फिलिप्पियों 1:6):

शान्ति का परमेश्‍वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें। तुम्हारा बुलाने–वाला सच्‍चा/विश्‍वासयोग्य है, और वह ऐसा ही करेगा।  (1 थिस्सलुनीकियों  5:23-24)

उदहारण प्रार्थना : है पिता परमेश्वर, मुझे माफ़ कर दीजिये मेरी अनुशासनहीनता के लिए। । मैं नियमित रूप से आपको तड़के खोजना चाहता हूँ। कृपया मेरी मदद कीजिये। आपके बेटे यीशु मसीह के नाम से।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional):
पवित्रीकरण (Sanctification)

 

अधिक अध्ययन करने के लिए:

https://www.desiringgod.org/articles/will-i-ever-change

https://www.desiringgod.org/articles/let-the-lukewarm-come-to-me

https://www.youtube.com/watch?v=tjJpts1UL98

https://www.gty.org/library/topical-series-library/234/a-practical-path-to-spiritual-maturity

https://www.gty.org/library/sermons-library/1385/keys-to-spiritual-growth-introduction

 

 

 

 

 

3 thoughts on “विजयी आत्मिक जीवन (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 20) (Weekly Doctrinal Devotional-20)”

  1. Neha Goyal says:

    Nice article…. Itne tough questions k answer itne easy… Thanku bhaiya.. Bible hamare liye ko easy bnane me …

  2. Durgesh says:

    गॉड ब्लेस यू आपका बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु आपको और बढ़ाएं प्रभु की दया उन सबो पर हो जो हमारे बढ़ाने का कारण बनते हैं

  3. Chanchal says:

    Thanks a lot bhaiya .

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