क्या यीशु मसीह अपने दूसरे आगमन से पहले सब के उद्धार पाने का इंतज़ार कर रहा है ?

क्या यीशु मसीह अपने दूसरे आगमन से पहले सब के उद्धार पाने का इंतज़ार कर रहा है ?

प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कुछ लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता कि कोई नष् हो, वरन् यह कि सब पश्चाताप करें। (2 पतरस 3:9)

कुछ लोग अपनी अज्ञानता और कुछ अपनी हठधर्मिता में यह कहते हैं की यीशु मसीह अभी तक लौट के इसलिए नहीं आया क्योंकि वह सब के पश्चाताप करने का इंतज़ार कर रहा है । क्या इस आयत का यह मतलब सही है ? नहीं। मैं आपको कॉमन सेंस के द्वारा और बाइबल में से इस आयत का सन्दर्भ तथा अन्य कुछ आयतें बताकर यह सिद्ध करूँगा कि यीशु मसीह सबके पश्चाताप का इंतज़ार नहीं कर रहा है।

यीशु मसीह दो हज़ार साल से नहीं आया। कुछ लोगों के हिसाब से वह सबके पश्चाताप करने और उद्धार पाने का इंतज़ार कर रहा है। यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण  और अतार्किक बात है। आप ही बताइये यीशु मसीह 200 सालों में आ जाता तो कम आत्माएं नरक जाती या 2000 साल तक इंतज़ार करके और अभी और भी इंतज़ार करके कम आत्माएं नरक में जा रहीं  हैं ? आप कहेंगे अगर 200 सालों में आ जाता तो उस समय कि जनसँख्या के हिसाब से आज कि तुलना में बहुत ही कम आत्माएं नरक में जाती, परन्तु 2000 साल तक नहीं आने के कारण तो अरबों-खरबों आत्माएं हर युग में नरक में चली गई। और अभी भी पता नहीं कितने और साल लगेंगे। इस तरह से तो हर साल लाखों लोग यीशु मसीह के बारे में बिना सुने या सुनकर उसको अस्वीकार करके नरक जा रहें हैं।

आपको यह तो समझ आ ही गया होगा कि यीशु मसीह सबके पश्चाताप करने का इंतज़ार नहीं कर रहा है। तो फिर 2 पतरस 3:9 में  क्यों  लिखा है कि वह तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता कि कोई नष् हो, वरन् यह कि सब पश्चाताप करें? 2 पतरस 3:1 में पतरस कहता है कि प्रियों यह दूसरा पत्र है जो मैं तुम्हें लिख रहा हूँ। यहाँ तुम कौन है ? उद्धार पाए लोग, कलीसिया। इस सन्दर्भ को ध्यान में रख कर 2 पतरस 3:9 को फिर से पढ़ें:

तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता कि कोई नष् हो, वरन् यह कि सब पश्चाताप करें। (2 पतरस 3:9)

यहाँ “तुम्हारे” किस के लिए प्रयुक्त किया गया है ? स्पष्ट है: कलीसिया के लिए। क्या प्रभु कि कलीसिया पूरी हो गई है ? नहीं। प्रभु कि कलीसिया दो हज़ार साल पहले प्रेरितो के काम अध्याय दो में शुरू हुई थी और हर युग में परमेश्वर के द्वारा जगत की उत्पत्ति से पहले से  चुने हुए लोग इसमें जोड़ दिए जाते हैं (इफिसियों २:२०-२२)

जितने अनन्त जीवन के लिये ठहराए गए थे, उन्होंने विश्वास किया। (प्रेरित 13:48)

जब पतरस कह रहा है कि यीशु मसीह तुम्हारे विषय में धीरज धर रहा है तो उसका मतलब है कि आने वाले समय में जितने चुने हुए लोग हैं उनका वो इंतज़ार कर रहा है।  जब आख़िरी साल में आख़िरी चुना हुआ व्यक्ति (कलीसिया का आख़िरी सदस्य) उद्धार पा लेगा तो प्रभु यीशु मसीह आ जायेगा। वैसे तो इतना कहना पर्याप्त होगा, पर फिर भी मैं आपको बाइबल में से कुछ और सबूत देना चाहता हूँ :

मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया। (इफिसियों 5:25)

इस आयत के हिसाब से मसीह ने अपने आपको किसके लिए कुर्बान किया ? अपनी कलीसिया के लिए। वो सिर्फ अपनी कलीसिया के पूरे होने का इंतज़ार कर रहा हैं और किसी का नहीं। कुछ और आयतें देखिये :

मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूँ।

परन्तु तुम इसलिये विश्वास नहीं करते क्योंकि मेरी भेड़ों में से नहीं हो। मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। (यूहन्ना 10:15;26-27)

क्या यीशु मसीह अपने दूसरे आगमन से पहले सब के उद्धार पाने का इंतज़ार कर रहा है ?

यीशु मसीह किस के लिए अपना प्राण देता है? अपनी भेड़ों अर्थात  चुने हुए लोगों के लिए। वो उनके लिए नहीं मरा जो उसकी भेड़ें नहीं हैं। जो उसकी भेड़ें नहीं हैं, वह उनको नहीं जानता; ना ही वे उस पर विश्वास करेंगी। तो फिर वो उनका इंतज़ार क्यों करेगा?

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