जल और आत्मा से जन्मना क्या होता है ? साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश-15


हम आज के भक्ति सन्देश में निम्न प्रश्नों का जवाब पाएंगे।

जल और आत्मा से जन्मना क्या होता है?

क्या उद्धार के लिए जल के बपतिस्मे कि आवश्यकता होती है?

क्या हम जल का बपतिस्मा लेकर नया जन्म पाते हैं ?

 


यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। (यहुन्ना  3:5)

इस आयत के 2 गलत मतलब निकाले जाते हैं। आइये उनको देखें।

पहला गलत मतलब:

कुछ लोग ये कहते हैं कि उद्धार के लिए गर्भ में जो पानी होता है और बच्चा जन्मने से पहले निकलता है, उस पानी (amniotic fluid) से जन्मना और फिर पवित्र आत्मा से जन्मना आवश्यक है। दुसरे शब्दों में शारीरिक जन्म और आत्मिक जन्म दोनों लेकर ही व्यक्ति उद्धार पा सकता है। मेरी नज़र में ये व्याख्या बहुत ही बेतुकी और अज्ञानतापूर्ण है। पहली बात तो यीशु मसीह ये क्यों कहेगा कि उद्धार पाने की पहली शर्त है दुनिया में पैदा होना और फिर आत्मा से पैदा होना ? जो पैदा नहीं हुआ, वो तो अस्तित्व में ही नहीं आया तो उसके उद्धार और न उद्धार का प्रश्न ही नहीं उठता। दूसरी बात, बच्चे के पैदा होने के लिए जल से जन्मना नाम का कोई मुहावरा ना तो इब्रानी, ना अरामी और ना यूनानी भाषा में पाया जाता है, जिनमे बाइबल लिखी गई है। तीसरी बात और सबसे महत्तवपूर्ण बात- इस हिसाब से तो जितने बच्चे कोख में ही मर जाते हैं या मार दिए जाते हैं, वो तो (इस व्याख्या के हिसाब से) जल से जन्मे ही नहीं और इसलिए वो सब नरक में जाएंगे, बल्कि हम बाइबल में से जानते हैं कि जितने भी भ्रूण या बच्चे मरते हैं वो स्वर्ग में जाते हैं। (इसलिए नहीं क्योंकि वो निष्पाप हैं, पर इसलिए क्योंकि आदम से पाए हुए पाप के लिए यीशु मसीह ने क्रूस पर उनकी कीमत चुकाई है। )

दूसरा गलत मतलब :

इस व्याख्या के अनुसार उद्धार के लिए पवित्र आत्मा से जन्मने के साथ साथ जल का बपतिस्मा लेना भी आवश्यक है। कुछ तो इस हद तक चले जाते हैं कि जल के बपतिस्मे के द्वारा ही आपको नया जन्म मिलता है। ऐसे लोग पानी का बपतिस्मा देकर बपतिस्मा लेने वाले को उस दिन नए जन्म की मुबारकबाद तक दे देते हैं। यह नरक में जाने वाले झूंठे शिक्षकों के द्वारा की गई एक शैतानी व्याख्या है। लेकिन जल शब्द के उपयोग के कारण कुछ सच्चे और अच्छे विश्वासी भी कभी-कभी भ्रमित हो सकते हैं। इस व्याख्या के अनुसार उद्धार के लिए बपतिस्मा लेने की अर्थात एक कर्म करने की भी ज़रूरत है। लेकिन यदि कर्मों से उद्धार होता है तो मसीहियत में और अन्य धर्मों में बताये गए उद्धार के मार्गों में क्या अंतर रह जाएगा ? सारे धर्म यही बोलते हैं कि कर्मों से उद्धार होता है। सिर्फ मसीहियत ही ऐसा धर्म है जिसमे बताया गया है कि हमारे कर्म ना तो उद्धार कर सकते हैं ना उद्धार में कुछ जोड़ सकते हैं। उद्धार शुरू से लेके अंत तक परमेश्वर का काम है। निम्न आयत को पढ़िए :

क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है, और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे। (इफिसियों 2:8-9)

इस आयत के अनुसार उद्धार हमारी और से या हमारे कर्मों के कारण नहीं है; परमेश्वर की और से दान है। यह अनुग्रह के कारण विश्वास करने पर ही होता है। परमेश्वर उद्धार के लिए सारी महिमा चाहता है। वो किसी को घमंड करने का अवसर नहीं देता।

पौलुस गलतियों की कलीसिया को कड़ी डाट पिलाता है क्योंकि वो उद्धार में खतने का कर्म जोड़ने की झूंठी शिक्षा पर विश्वास कर रहे थे :

हे निर्बुद्धि गलातियो, किसने तुम्हें मोह लिया है? तुम्हारी तो मानो आँखों के सामने यीशु मसीह क्रूस पर दिखाया गया! मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूँ कि तुम ने आत्मा को, क्या व्यवस्था के कामों से या विश्वास के समाचार से पाया? 3क्या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो कि आत्मा की रीति पर आरम्भ करके अब शरीर की रीति पर अन्त करोगे? (गलतियों  3:1-3)

प्रभु यीशु मसीह ने क्रूस पर जो किया और पवित्र आत्मा ने आपके अंदर जो किया उसमे आप अपने कर्म नहीं जोड़ सकते। प्रभु यीशु मसीह ने क्रूस पर उद्धार का काम पूरा किया और पवित्र आत्मा उस काम को हमे नया जन्म देकर हम पर लागू करता है। यदि आप को ये लगता है कि आपके बपतिस्मा लेने से आप का उद्धार हुआ है या उद्धार के उद्धार का काम पूरा हुआ है तो आप एक फरीसी के सामान हो, जो अपने कर्मों से उद्धार में विश्वास रखते थे और आपका उद्धार नहीं हुआ है। आप नरक जा रहें हैं। और आपको नरक में और भी अधिक दंड मिलेगा, क्योंकि आपने यीशु मसीह को, उसके क्रूस को और उसके वचन को अपने कर्मो के सामने तुच्छ जाना। क्योंकि परमेश्वर आपकी घमंडी स्व-धार्मिकता को ग्रहण नहीं करता; यीशु मसीह कि धार्मिकता को ग्रहण करता है। परमेश्वर के अनुग्रह से यीशु मसीह पर विश्वास करने पर ही उद्धार सम्भव है।

इस आयत का सही मतलब:

यहुन्ना 3:3 में यीशु मसीह निकुदिमस से कहते हैं: “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।”

यहुन्ना 3:5 में यीशु मसीह निकुदिमस को और भी अच्छे से समझाने के लिए ये कहते हैं: “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।”

यहुन्ना 3:7 में निकुदिमस के अचम्भे को देख कर यीशु मसीह कहते हैं :अचम्भा न कर कि मैं ने तुझ से कहा, ‘तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।”

इन तीनो वचनो को सन्दर्भ में पढ़ने से स्पष्ट हो जाता है कि यहुन्ना 3:5 में जल और आत्मा से जन्मना नए सिरे से जन्म लेना ही है; कोई नई बात नहीं। नए सिरे से जन्म लेना यूनानी भाषा में अक्षरक्षः ऊपर से जन्म लेना है। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि हम ऊपर से अर्थात स्वर्ग से जन्म ना लें तो हम उद्धार पा कर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते। यीशु मसीह यहाँ आपको उद्धार पाने का तरीका नहीं बता रहा कि ये कर्म करो, तो उद्धार हो जायेगा। लुका 18:26-27 में जब यीशु मसीह से पूछा गया कि किसका उद्धार हो सकता है तो उसने कहा मनुष्य के लिए तो यह असंभव है, परन्तु परमेश्वर के लिए सब कुछ संभव है यीशु मसीह यहुन्ना 3 में यह बता रहा है कि परमेश्वर उद्धार कैसे करता है। वह उद्धार नया जन्म देकर करता है। अज्ञानी मनुष्यों को यह लगता है कि हम कुछ कर्म करेंगे तो हमे नया जन्म मिल जाएगा। वो यह नहीं देख रहें हैं कि यीशु मसीह “जन्म लेना” वाक्यांश का प्रयोग कर रहें है। यही काफी होना चाहिए यह समझने के लिए कि जल और आत्मा से या किसी भी चीज़ से जन्म लेना हमारे लिए असम्भव है। कोई खुद जन्म नहीं लेता। क्या आपने अपनी मर्जी और अपने कर्मों के द्वारा अपने माँ बाप से जन्म लिया है ? नहीं ना? तो जल और आत्मा से भी आप नहीं जन्मते। परमेश्वर ही आप को जल और आत्मा से जन्म देता है। आपका उसमे कुछ योगदान नहीं होता। इसी अध्याय की आठवीं आयत में यीशु मसीह यह स्पष्ट कर देता है :

हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।” (यूहन्ना 3:8)

जैसे हम हवा को नियंत्रित नहीं कर सकते, परन्तु सिर्फ उसका प्रभाव देखते हैं। वैसे ही हम पवित्र आत्मा को नियंत्रित नहीं कर सकते, वो जिसको चाहता है, नया जन्म दे देता है और उद्धार को क्रियान्वित कर देता है और बाकी हज़ारों वचन सुनने वालों को छोड़ देता है। यह वचन देखिये:

रन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्‍वर की सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्‍वास रखते हैं। वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्‍वर से उत्पन्न हुए हैं। (यूहन्ना 1:12-13)

जितने लोग विश्वास करते हैं, वो क्यों करते हैं ? मनुष्य ने अपनी स्वेच्छा को इस्तेमाल करके यीशु मसीह को स्वीकार कर लिया इसलिए ? नहीं । परन्तु क्योंकि वो परमेश्वर से जन्म ले चुके हैं। तेरहवी आयत साफ़ साफ़ कहती है इसमें मनुष्य कि इच्छा का कोई योगदान नहीं। आइये एक और आयत देखिये :

उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया। (याकूब 1:18)

किसकी इच्छा से ? परमेश्वर ने अपनी ही इच्छा से नया जन्म दिया।

“जल से जन्मना” वाक्यांश का इस्तेमाल क्यों किया ?: 

आप सोच रहे होंगे कि आत्मा से जन्मना तो स्पष्ट हो गया, लेकिन “जल से जन्मना” वाक्यांश का इस्तेमाल क्यों किया गया ? जल शब्द का इस्तेमाल शुद्धिकरण के अर्थ में किया गया है। नए जन्म में हमारा हमारे पुराने स्वभाव और पापों से शुद्धिकरण होता है। उसी को इंगित करने के लिए यीशु मसीह ने “जल से जन्मना” वाक्यांश का इस्तेमाल किया। आइये कुछ आयतें देखें :

  • मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाओगे; और मैं तुम को तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा। मैं तुम को नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा, और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकालकर तुम को मांस का हृदय दूँगा। मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर देकर ऐसा करूँगा कि तुम मेरी विधियों पर चलोगे और मेरे नियमों को मानकर उनके अनुसार करोगे। (एजेहकेल  36:25-28)

इन आयतों में पवित्र आत्मा के द्वारा नया जन्म (जिसमे पुराने मनुष्यत्व, मूर्तों और पापों से शुद्धिकरण भी शामिल है) देने के बारे में बताया गया है। परमेश्वर यहाँ अक्षरक्षः भौतिक जल की बात नहीं कर रहा है, क्योंकि उससे सिर्फ शरीर का मैल धुल सकता है, पाप नही। यहाँ जल शब्द का इस्तेमाल शुद्धिकरण को इंगित करने के लिए हुआ है। ऐसा ही यूहन्ना 3:5 में भी हुआ है।

  • तो उसने हमारा उद्धार किया; और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार नए जन्म के स्‍नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। (तीतुस 3:5)

इस आयत में भी नए जन्म को स्नान से जोड़ा गया है। यह बपतिस्मा कि बात नहीं कर रहा, क्योंकि पहले ही बता दिया गया है कि हमारा उद्धार हमारे धर्म के कामों के कारण नहीं, परन्तु नए जन्म के स्नान अर्थात शुद्धिकरण और नया बनाने के द्वारा हुआ है। किसने किया यह ? पवित्र आत्मा ने।

  • उसको वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए। (इफिसियों  5:26)

यह वचन भी स्पष्ट कर देता है कि जल का स्नान वाक्यांश आत्मा के द्वारा वचन के माध्यम से शुद्धिकरण को इंगित करने के लिए इस्तेमाल किया गया है।

आइये कुछ बिंदुओं में हम दोहरा ले कि हम क्या सीखे:

1) “जल से जन्मने” का शिशु के जन्म से पहले निकलने वाले पानीऔर शिशु के शारीरिक जन्म से कोई सम्बन्ध नहीं है।
2) जल से जन्मने का पानी के बपतिस्मे से कोई सम्बन्ध नहीं है।
3) आत्मा से जन्मने में पानी के बपतिस्मे का कोई योगदान नहीं है।
4) जल से जन्मने का अर्थ शुद्धिकरण है जो कि आत्मा से जन्मने या नए जन्म का ही एक भाग है ।
5) हमारा पवित्र आत्मा के द्वारा पुराने मनुष्यत्त्व से शुद्धिकरण और नया जन्म हमारी इच्छा या किसी कर्म के द्वारा नहीं होता; परमेश्वर कि अपनी इच्छा के द्वारा होता है।

पश्च लेख:
पवित्र आत्मा से मिले नए जन्म में हमारा परिवर्तन हो जाता है। परमेश्वर पत्थर का ह्रदय निकाल कर उसके प्रति सवेंदनशील दिल दे देता है। नए जन्म में हमे नयी इच्छा का दान मिलता है, और हम इस नयी इच्छा अर्थात स्वेच्छा से और ख़ुशी से यीशु मसीह के पीछे हो लेते हैं। हमे विश्वास और पश्चाताप का दान मिलता हैं, जिसके द्वारा हम विश्वास और पश्चाताप करते हैं।

कहने का अर्थ है नया जन्म पहले होता है, हम विश्वास बाद में करते हैं।

प्रोत्साहन: 

परमेश्वर ने हमे हमारे पापों में मृत होने से जिला दिया। अपनी ही मर्ज़ी से नया जन्म देकर अपना बना लिया। आइये उसका धन्यवाद और उसकी स्तुति करें।

उदाहरण प्रार्थना:

है पिता आपका धन्यवाद मुझे उद्धार की शिक्षा को ठीक से समझाने के लिए। मैं सारी महिमा आपको देने वाला हो सकूँ। आपके बेटे के नाम से। आमीन।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional):

उद्धार की शिक्षा, नए जन्म की शिक्षा  (Doctrine of Salvation, Doctrine of Regeneration)

अधिक अध्ययन करने के लिए:

https://www.gty.org/library/questions/QA79/is-baptism-necessary-for-salvation

https://www.gty.org/library/bibleqnas-library/QA0051/does-water-baptism-save

https://www.gty.org/library/sermons-library/81-97/you-must-be-born-again

 

3 thoughts on “जल और आत्मा से जन्मना क्या होता है ? साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश-15”

  1. Chanchal says:

    Thank you so much bhaiya. bahut hi achchhe s ek ek vachan ko explain karke sikhaane k liye.

  2. Seema sangeliya says:

    Thank you so much bhaiya… bible ki hard verse ko bahut hi deep m lejakr smjhne k liye…or Galt means ko clear and right means ko batane k liye… God bless you

  3. Yogesh says:

    👍

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