Reformed baptist church in jaipur

दुखी पुरुष यीशु

वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरुष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उससे मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और हम ने उसका मूल्य न जाना। (यशायाह 53:3) 

हम सोशल मीडिया के ज़माने में रहते हैं और मनुष्यों का मूल्य उनको मिली लाइक्स, फ्रेंड लिस्ट और फैन-फॉलोविंग के द्वारा आँका जाता है । राजनीतिज्ञ, अभिनेता या कोई सेलिब्रिटी जहाँ भी जाते हैं, वहां भीड़ इकट्ठी हो जाती  उनको सम्मान मिलता है। लोग उनसे हाथ मिलाने सेल्फी लेने के लिए होड़ करते हैं। यहाँ तक कि सेलिब्रिटीज के बच्चे भले ही उन्होंने अभी तक जीवन में कुछ हांसिल नहीं किया हो, को भी सम्मान मिल जाता है। लेकिन कैसी विडम्बना है कि स्वर्ग का राजकुमार जब देहधारण करके पृथ्वी पर आया तो लोगों ने उसे तुच्छ जाना। एक फिल्म-डायरेक्टर, लेखक या पेंटर का सम्मान होता है, लेकिन इस दुनिया को सिर्फ आज्ञा देकर कुछ भी नहीं में से अस्तित्व में लाने वाला, इसमें रंग भरने वाला, आसमान के तारे बनाने वाला, सभी प्राणियों को जीवन देने वाला सर्वशक्तिमान परमेश्वर इस पृथ्वी पर आया और उसके बनाये हुए लोगों ने उसको तुच्छ जाना। हाँ वह दीन होकर एक चरनी में पैदा हुआ, लेकिन उसने और उसके पिता ने उसके दिव्य होने के सारे सबूत दिए। परमेश्वर ने यीशु के बपतिस्मे पर उसकी गवाही दी।  यीशु के चिन्ह और चमत्कार उसके मसीहा होने के सबूत थे।  परन्तु फिर भी लोगों ने, यहाँ तक कि  उसके अपने कहलाने वाले लोगों ने उसको अस्वीकार कर दिया और अपना शत्रु समझा।  उसका मजाक उड़ाया, उस से धक्का-मुक्की की, उसका निरादर किया और अंत में उसे एक अपराधी  की तरह पकड़वा दिया।  उसके अपने प्रेरित भी डर के मारे उसे छोड़ भागे।  सैनकों और अधिकारीयों ने भी उसका बहुत निरादर किया और उसे मारा। इज़राइल के लोगों ने बरअब्बा जैसे दोषी को छुड़ा लिया, परन्तु निर्दोष और पवित्र यीशु को क्रूस पर चढ़ाने की मांग की।  यीशु को काँटों का मुकुट पहनाया गया, उसके हाथों और पैरों में कीलें ठोक के उसे क्रूस पर लटका दिया।  जब वह क्रूस पर लटक रहा था, तब भी लोग उसका मजाक उड़ाने और उसका तिरस्कार करने  से बाज़ न आए।  

कैसी विडम्बना है कि लोग उसी को मार रहे थे जो उनको जीने के लिए साँसे दे रहा था।  वे जीवन के कर्ता को मार रहे थे (प्रेरितों  3:15)।  लेकिन यीशु सब कुछ सहता रहा, क्योंकि वह दुःख उठाने ही आया था, ताकि हमें बचा सके।  स्वयं पिता परमेश्वर ने भी उसे क्रूस पर त्याग दिया, क्योंकि वह क्रूस पर त्रिएक परमेश्वर की योजना के अनुसार  स्वेच्छा से हमारा नरक (हमारे पापों का दंड) पीने के लिए चढ़ा था। पिता परमेश्वर ने उसे त्याग दिया ताकि उसमें होकर हमें अपना सके। आज हमारे लिए मार्ग खुला है। यदि हम हमारे पापों की क्षमा के लिए उसकी मृत्यु और हमारे धर्मिकरण के लिए उसके पुनरुत्थान पर भरोसा करें, तो हम परमेश्वर की संताने बन जाएंगे (यूहन्ना 1:10-12)।

 

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