त्रिएक परमेश्वर से प्रार्थना


“दर्शन की तराई” पुस्तक में से पहली प्रार्थना

(First Prayer from the Book “Valley of Vision”)

एक में तीन, तीन में एक,

मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर,

स्वर्गीय पिता, धन्य पुत्र, अनादि आत्मा,

तीन भिन्न व्यक्तियों में एक परमेश्वर,

मैं आपकी एक ही परमेश्वर के रूप में

आराधना करता हूँ

पापियों को आपका और आपके राज्य का ज्ञान कराने के लिए।

 

है पिता, आपने मुझसे प्रेम किया और यीशु को मुझे छुड़ाने के लिए भेजा;

है यीशु आपने मुझसे प्यार किया और मेरा (मानव) स्वभाव ले लिया,

आपका खून मेरे पाप धोने के लिए बहाया,

मेरी अयोग्यता को ढंकने के लिए धार्मिकता को पूरा किया;

 

है पवित्र आत्मा, आपने मुझ से प्यार किया और मेरे दिल में आ गए,

अनंत जीवन रोप दिया,

मुझे यीशु मसीह की महिमा दिखाई।

 

तीन व्यक्ति और एक परमेश्वर, मैं आपको धन्य कहता हूँ और आपकी प्रशंसा करता हूँ,

आपके उस प्रेम के लिए जिसके हम योग्य ना थे, जो बयां से बाहर है,

जो अद्भुत है , और खोये हुओं को बचाने

और महिमा के लिए जिलाने में सामर्थी है।

 

है पिता, आपका धन्यवाद कि आपने अनुगृह की भरपूरी में

मुझे यीशु को उनकी भेड़, गहना और भाग होने के लिए दिया;

 

है यीशु आपका धन्यवाद की आपने अनुगृह की भरपूरी में

मुझे स्वीकार कर लिया, अपना बना लिया, बाँध लिया;

 

है पवित्र आत्मा, आपका धन्यवाद की आपने अनुगृह की भरपूरी में

यीशु को मेरे उद्धार के रूप में मुझे दिखाया,

मुझ में विश्वास बो दिया,

मेरे हठी दिल को अपने अधीन कर लिया,

मुझे यीशु मसीह के साथ सदा के लिए एक कर दिया।

 

है पिता, आप सिहांसन पर विराजमान है

मेरी प्रार्थनाएं सुनने के लिए,

है यीशु, आपका हाथ फैला हुआ है मेरी विनतियों को लेने के लिए,

 

है पवित्र आत्मा, आप तैयार हैं मेरी कमजोरियों में मेरी मदद करने के लिए,

मुझे मेरी ज़रूरत दिखाने के लिए,

मुझे शब्द देने के लिए, मेरे अंदर प्रार्थना करने के लिए,

मुझे हिम्मत देने के लिए ताकि मैं प्रार्थना में कमजोर ना हो जाऊं।

 

है त्रिएक परमेश्वर, आप जो सारे ब्रहम्माण्ड पर राज करते हैं,

आपने मुझे आज्ञा दी की मैं आपसे वो चीज़ें मांगू

जो आपके राज्य और मेरे आत्मा से सम्बन्ध रखती है।

मैं त्रिएक नाम में बपतिस्मा पाए के रूप में जी संकु और प्रार्थना कर संकु।

 

THREE IN ONE, ONE IN THREE, GOD OF MY SALVATION,

Heavenly Father, blessed Son, eternal Spirit,

I adore thee as one Being, one Essence,

one God in three distinct Persons,

for bringing sinners to thy knowledge and to

thy kingdom.

O Father, thou hast loved me and sent Jesus to

redeem me;

O Jesus, thou hast loved me and assumed my

nature,

shed thine own blood to wash away my sins,

wrought righteousness to cover my

unworthiness;

O Holy Spirit, thou hast loved me and entered

my heart, implanted there eternal life,

revealed to me the glories of Jesus.

Three Persons and one God, I bless and praise thee,

for love so unmerited, so unspeakable,

so wondrous, so mighty to save the lost

and raise them to glory.

O Father, I thank thee that in fullness of grace

thou hast given me to Jesus, to be his sheep,

jewel, portion;

O Jesus, I thank thee that in fullness of grace

thou hast accepted, espoused, bound me;

O Holy Spirit, I thank thee that in fullness of

grace thou hast

exhibited Jesus as my salvation,

implanted faith within me,

subdued my stubborn heart,

made me one with him for ever.

O Father, thou art enthroned to hear my prayers,

O Jesus, thy hand is outstretched to take my

petitions,

O Holy Spirit, thou art willing to help my

infirmities, to show me my need,

to supply words, to pray within me,

to strengthen me that I faint not in

supplication.

O Triune God, who commandeth the universe,

thou hast commanded me to ask for those

things that concern thy kingdom and my soul.

Let me live and pray as one baptized into the

threefold Name.

 

 

 

 

 

 

 

 

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