मनुष्य को बनाने पर उसकी सृष्टिगत अवस्था में परमेश्वर ने उसके सामने क्या विधान या व्यवस्था रखी ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-12)

मनुष्य को बनाने पर उसकी सृष्टिगत अवस्था में परमेश्वर ने उसके सामने क्या विधान या व्यवस्था रखी ?

उत्तर: मनुष्य को बनाने पर परमेश्वर ने उसके साथ सिद्ध आज्ञापालन की शर्त पर जीवन की वाचा बनाई (गलातियों 3:12)  और भले और बुरे के ज्ञान के फल को खाने से मना किया, जिसको ना मानने की सजा मृत्यु ठहराई (उत्पत्ति  2:17)।

साक्षी आयतें:

पर व्यवस्था का विश्‍वास से कोई सम्बन्ध नहीं; क्योंकि “जो उनको मानेगा, वह उनके कारण जीवित रहेगा।” (गलातियों 3:12)

पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना : क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।”  (उत्पत्ति  2:17)

व्याख्या: 

परमेश्वर ने सारी सृष्टि को बनाने के बाद मनुष्य को अपने स्वरुप में पवित्र, धर्मी, बुद्धिमान करके बनाया। वो परमेश्वर का स्वरूपधारी (image-bearer) था। परमेश्वर ने उसे अपने प्रतिनिधि के रूप में अपनी सृष्टि पर राज करने को दिया। परन्तु परमेश्वर ने आदम के साथ एक वाचा बांधी। परमेश्वर ने उसे अदन की वाटिका के सब फल खाने की अनुमति दी थी, पर अच्छे और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को ना खाने को कहा। उसने कहा कि यदि वो इस फल को खायेगा तो निश्चित रूप से मर जाएगा:

और यहोवा परमेश्‍वर ने आदम को यह आज्ञा दी, “तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है; पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना : क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।”(उत्पत्ति 2:16-17)

परमेश्वर ने मनुष्य को अच्छा करके बनाया, परन्तु शर्त यह थी कि वह सिर्फ आज्ञापालन करेगा तो ही जीवित रहेगा, अन्यथा मर जाएगा:

पर व्यवस्था का विश्‍वास से कोई सम्बन्ध नहीं; क्योंकि “जो उनको मानेगा, वह उनके कारण जीवित रहेगा।” (गलातियों 3:12)

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