क्या परमेश्वर पछताता है और अपनी इच्छा बदलता है?
क्या परमेश्वर पछताता है और अपनी इच्छा बदलता है? पहली बात तो ये प्रश्न पूछना ही गलत, अतार्किक है, मूर्खतापूर्ण है। ये प्रश्न पूछना ऐसा है जैसे कोई पूछे कि उजाला अँधेरा होता है क्या ? यदि कोई कहे कि परमेश्वर पछताता है या अपनी इच्छा बदल देता है, तो मुझे जोर से गुस्सा आता …
