1991

आप जितने अधिक मसीह के समान होंगे, संसार उतना ही अधिक आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा उसने मसीह के साथ किया था। शायद आपको अधिक सताव इसलिए नहीं मिलता है क्योंकि जैसी समानता होनी चाहिए वैसी नहीं है।