मसीही प्रश्नोत्तरी (Catechism)

मनुष्य जिस अवस्था में गिरा, उसमे क्या दुर्गति है ? ((चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-18)

मनुष्य जिस अवस्था में गिरा, उसमे क्या दुर्गति है ? उत्तर: पतन के कारण सम्पूर्ण मनुष्य जाति का परमेश्वर के साथ रिश्ता टूट गया (उत्पत्ति 3:8,24), वे उसके क्रोध और शाप के अंतर्गत आ गए (इफिसियों 2:3; गलातियों 3:10) और इस जीवन के सम्पूर्ण दुखों, मृत्यु और फिर नरक की सदाकालीन पीड़ाओं के भागी हो …

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उस अवस्था की पापमयता किन बातों में निहित है, जिसमें मनुष्य गिर गया ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-17)

उस अवस्था की पापमयता किन बातों में निहित है, जिसमें मनुष्य गिर गया ? उत्तर: जिस अवस्था में मनुष्य गिरा, उस अवस्था की पापमयता आदम के प्रथम पाप के दोष (रोमियों 5:19), मूल धार्मिकता की कमी (रोमियों 3:10), सम्पूर्ण स्वभाव की भ्रष्टता, जिसे सामान्य रूप से मूल पाप कहा जाता है (इफिसियों 2:1; भजन सहिंता …

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पतन मनुष्य जाति को किस अवस्था में ले आया ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-16)

पतन मनुष्य जाति को किस अवस्था में ले आया ? उत्तर: पतन मनुष्य जाति  को पाप और दुर्गति की अवस्था में ले आया (रोमियों 5:18)। साक्षी आयतें: इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित्त …

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क्या आदम के पाप में सम्पूर्ण मनुष्य जाति पतित हो (गिर) गई ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-15)

क्या आदम के पाप में सम्पूर्ण मनुष्य जाति पतित हो (गिर) गई ? उत्तर: आदम के साथ बाँधी गई वाचा सिर्फ उसके लिए नहीं थी, परन्तु उसके सम्पूर्ण वंश के लिए भी थी। सामान्य प्रजनन के द्वारा उससे उत्पन्न सम्पूर्ण मनुष्य जातिसामान्य प्रजनन के द्वारा उससे उत्पन्न सब मनुष्य ने उसमे पाप किया और उसके …

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पाप क्या है ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-14)

पाप क्या है ? उत्तर: पमेश्वर के कानून/व्यवस्था को न मानना या उसका उल्लंघन करना पाप है (1 यूहन्ना 3:4)। साक्षी आयतें: जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है; और पाप तो व्यवस्था का विरोध है।  (1 यूहन्ना 3:4) इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये …

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क्या हमारे माता पिता उस अवस्था में बने रहे, जिसमे उनकी सृष्टि हुई थी ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-13)

क्या हमारे माता पिता उस अवस्था में बने रहे, जिसमे उनकी सृष्टि हुई थी ? उत्तर: अपनी स्वतंत्र इच्छा पर छोड़ दिए जाने पर हमारे प्रथम माता-पिता ने वर्जित फल खाकर  (उत्पत्ति 3:6-8) परमेश्वर के खिलाफ पाप किया  (सभोपदेशक 7:29) और उस अवस्था से गिर गए जिसमे उनको बनाया गया था। साक्षी आयतें: अत: जब …

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मनुष्य को बनाने पर उसकी सृष्टिगत अवस्था में परमेश्वर ने उसके सामने क्या विधान या व्यवस्था रखी ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-12)

मनुष्य को बनाने पर उसकी सृष्टिगत अवस्था में परमेश्वर ने उसके सामने क्या विधान या व्यवस्था रखी ? उत्तर: मनुष्य को बनाने पर परमेश्वर ने उसके साथ सिद्ध आज्ञापालन की शर्त पर जीवन की वाचा बनाई (गलातियों 3:12)  और भले और बुरे के ज्ञान के फल को खाने से मना किया, जिसको ना मानने की …

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परमेश्वर के प्रबंधन (सृष्टि के रख-रखाव) के कार्य क्या हैं ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-11)

परमेश्वर के प्रबंधन (सृष्टि के रख-रखाव) के कार्य क्या हैं ? उत्तर: परमेश्वर के द्वारा उसकी परम पवित्रता  (भजन सहिंता 145:17), बुद्धि (यशायाह 28:29) और सामर्थ (इब्रानियों 1:3) के साथ सब प्राणियों को जीने और उनके सब कार्य करने की शक्ति देने और उन पर प्रभुता करने को प्रबंधन के कार्य कहा जाता है (भजन …

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परमेश्वर ने मनुष्य की रचना कैसे की? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-10)

परमेश्वर ने मनुष्य की रचना कैसे की? उत्तर: परमेश्वर ने मनुष्य की रचना अपने ही स्वरुप में  पुरुष और स्त्री करके (उत्पत्ति 1:27), ज्ञान, धार्मिकता, और पवित्रता से लैस करके (कुलुस्सियों 3:10; इफिसियों 4:24) और सृष्टि के ऊपर शासक के रूप में की (उत्पत्ति1:28)।   साक्षी आयतें: तब परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के …

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सृष्टि निर्माण का कार्य क्या है ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-9)

सृष्टि निर्माण का कार्य क्या है ? उत्तर: परमेश्वर के द्वारा बिना किसी वस्तु के अपनी सामर्थ के वचन (इब्रानियों 11:3) के द्वारा छः सामान्य निरंतर दिनों में ((उत्पत्ति 1:31) सब कुछ,(उत्पत्ति 1:1) जो बहुत अच्छा (उत्पत्ति 1:31) था बनाये जाने को सृष्टि निर्माण का कार्य कहते हैं। साक्षी आयतें: विश्‍वास ही से हम जान …

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