पवित्रशास्त्र मुख्य रूप से क्या सिखाता है ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-3)

3. पवित्रशास्त्र मुख्य रूप से क्या सिखाता है ? उत्तर: पवित्र शास्त्र मुख्य रूप से यह सिखाता है कि मनुष्य को परमेश्वर के विषय में क्या विश्वास करना है और मनुष्य के परमेश्वर के प्रति क्या कर्तव्य हैं। (2 तीमुथियुस 1:13; सभोपदेशक 12:13) साक्षी आयतें: जो खरी बातें तू ने मुझ से सुनी हैं उनको… Continue reading पवित्रशास्त्र मुख्य रूप से क्या सिखाता है ? (चार्ल्स स्पर्जन प्रश्नोत्तरी-3)

विजयी आत्मिक जीवन (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 20) (Weekly Doctrinal Devotional-20)

मसीही जवान सालों-साल एक ही प्रश्न अलग अलग शब्दों में पूछते रहते हैं: मैं आत्मिक रूप से कैसे बढूं? मैं पाप पर विजय कैसे प्राप्त करूँ? मैं प्रभु को प्रसन्न करने वाला जीवन कैसे जीऊं? मैं काम-वासना/पोर्नोग्राफी/हस्थमैथुन पर विजय कैसे पाऊं? मैं आत्मनियंत्रण कैसे करूँ ? मैं पवित्र कैसे बनु?   वो इन प्रश्नों के… Continue reading विजयी आत्मिक जीवन (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 20) (Weekly Doctrinal Devotional-20)

या तो सुबह जल्दी, या कभी नहीं (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 17) (Weekly Doctrinal Devotional-17)

हम विश्वासी सुबह जल्दी उठकर प्रार्थना, बाइबल पठन और मनन के द्वारा परमेश्वर को नहीं खोजने के कई बहाने बना सकते हैं; जैसे मैं नाईट पर्सन हूँ। मैं रात में सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव होता हूँ। सुबह इतने काम होते हैं, संभव ही नहीं होता। हमे विधिवादी (legalist) नहीं होना चाहिए। मैं मॉर्निंग पर्सन नहीं हूँ।… Continue reading या तो सुबह जल्दी, या कभी नहीं (साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश- 17) (Weekly Doctrinal Devotional-17)

मसीहियत दिल का धर्म है। साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -12)

मसीहियत बाहरी धार्मिक गतिविधियों का धर्म नहीं है, बल्कि दिल का धर्म है। अर्थात एक सच्चा मसीही परमेश्वर से अपने दिल से, अपनी भावनाओं से, अपने अंतर्मन से, अपने आत्मा से प्रेम करता है और उसमे आनंदित होता है, उसमे मगन रहता है, उसमे घमंड करता है, उसके बारे में डींग भरता है, उसकी प्रशंसा… Continue reading मसीहियत दिल का धर्म है। साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -12)

ग्रहण योग्य दान !

जब भी कोई धनी व्यक्ति गरीबों की मदद करने के लिए किसी संस्था का निर्माण करता है तो समाज के लोग जरूर उस पर ध्यान देते है और ऐसा व्यक्ति अपने दयावान होने और जरूरतमंदो को देने की वजह से बहुत प्रशंसा पाता है। और ज्यादातर लोग ये ही दिखाना चाहते है कि वो कितने… Continue reading ग्रहण योग्य दान !

परमेश्वर का नाम व्यर्थ में लेना क्या होता है?

तीसरी आज्ञा कहती है: “तू अपने प्रभु परमेश्वर का नाम व्यर्थ ना लेना. जो कोई उसका नाम व्यर्थ लेगा उसे वो किसी रीती से निर्दोष नहीं ठहराएगा.” परमेश्वर का नाम व्यर्थ लेने का अर्थ क्या है? मूल भाषा में “लेने” के लिए जो शब्द इस्तेमाल किया गया है वो है “नासा”. जिसका अर्थ सिर्फ “लेना”… Continue reading परमेश्वर का नाम व्यर्थ में लेना क्या होता है?