साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -2)

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वचन की महिमा

हम ऐसे समय में रह रहें है जब अपने अनुभवों को अधिक महत्तव दिया जाता है और परमेश्वर के मुँह से निकले शब्द अर्थात बाइबल को कम। कई कलीसियाओं में तो वचन पर ध्यान देना पवित्र आत्मा का अपमान माना जाता है। ऐसी कलीसियाओं के लोग प्रार्थना में वचन को पढ़ने, अध्ययन करने, उस पर मनन करने और उसका अपने जीवन में पालन करने की सामर्थ नहीं माँगते। वरन वे लोग स्वप्न दर्शन और स्वर्गदूतों का प्रकटीकरण माँगते हैं।  ये बहुत ही मूर्खतापूर्ण और खतरनाक बात है। क्योंकि बाइबल पूरी हो चुकी है और परमेश्वर बाइबल के बाहर कुछ नहीं बोलता। बाइबल के बाहर शैतान बोलता है या मनुष्य का छली दिल। आइये हम पवित्र आत्मा की सामर्थ से वचन के महत्त्व को समझें:

वचन के द्वारा ही नया जन्म:

उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया  (याकूब 1 :18 )

क्योंकि तुम ने नाशवान् नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्‍वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। (1 पतरस  1:23)

वचन का महत्त्व आपके लिए वैसा ही है जैसा एक बच्चे के लिए उसके माँ बाप का। जैसे एक बच्चा अपने माँ बाप के बिना अस्तित्व में नहीं आ सकता, वैसे ही हम जो पाप में मरे हुए थे, परमेश्वर ने हमे वचन के द्वारा जिलाया, अर्थात आत्मिक रूप से ज़िंदा किया। याकूब 1 :18  और 1 पतरस 1:23 के अनुसार, अगर हम आज मसीही हैं, तो वचन के द्वारा ही है। कितने मूर्ख हैं वो लोग जो वचन से लजाते हैं और वफादारी के साथ वचन की घोषणा करने के बजाय पाप में मरे हुए लोगों को मनोरंजन, संगीत, अच्छा माहौल, भावनात्मक प्रेम और आधा अधूरा तोड़ा-मरोड़ा वचन देकर मसीही बनाना चाहते हैं !

वचन के द्वारा ही आत्मिक पोषण:

नये जन्मे हुए बच्‍चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ, यदि तुम ने वास्तव में  प्रभु का स्वाद चख लिया है कि वो भला है। (1 पतरस 2:2-3)

(वचन का) ठोस आहार बड़ों के लिए होता है, जिन के ज्ञानेन्द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं। (इब्रानियों  5:14)

मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं,

परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्‍वर के

मुख से निकलता है,

जीवित रहेगा। (मत्ती 4:4)

बच्चे को अपने माँ बाप से जन्मने के बाद किस चीज़ की ज़रूरत पड़ती हैं? पोषण की। माँ अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं और बड़ा होने पर ठोस आहार देती है। जैसे बच्चे को जन्मने के बाद बढ़ने के लिए आहार की ज़रूरत होती है, वैसे ही हम विश्वासियों को वचन के द्वारा नया जन्म पाने के बाद पोषण की ज़रूरत होती है। ये पोषण हमें कैसे मिलता है? पतरस (1 पतरस 2:2-3), इब्रानियों के लेखक (इब्रानियों  5:14)  और हमारे प्रभु यीशु मसीह (मत्ती 4:4) के अनुसार यह पोषण हमे वचन का निर्मल दूध पीने और वचन की रोटी और वचन का  मांस खाने से मिलता है। बच्चा ज़िंदा है और स्वस्थ है, इसका क्या सबूत है ? बच्चे का दूध के आहार के लिए लालायित रहना। 1 पतरस 2:2-3 में पतरस के शब्दों का अर्थ है कि यदि हमने वास्तव में प्रभु का स्वाद चखा है (अर्थात वचन से जन्म लेकर उद्धार पाया है), तो हमारे अंदर वचन के शुद्ध दूध की  लालसा होगी। इस वचन के शुद्ध दूध के द्वारा ही हम उद्धार में बढ़ेंगे।

वचन के द्वारा ही स्वर्ग पहुंचने तक हमारी रक्षा :

कि (मसीह) उसको (कलीसिया को) वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए, और उसे एक ऐसी तेजस्वी कलीसिया बनाकर (स्वर्ग में मेमने के विवाह में ) स्वयं के सामने प्रस्तुत करे, जिसमें कलंक, झुर्री, कोई और ऐसी वस्तु हो वरन् पवित्र और निर्दोष हो। (इफिसियों  5:26-27)

अब मैं तुम्हें परमेश्‍वर को, और उसके अनुग्रह के वचन को सौंप देता हूँ; जो तुम्हारी उन्नति कर सकता है और सब पवित्र किए गए लोगों में साझी करके मीरास दे सकता है। (प्रेरितों  20:32)

अच्छा होगा यदि तुम यह समझकर उस (वचन) पर ध्यान करते रहो कि वह एक दीया है, जो अन्धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ फटे और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में चमक उठे (अर्थात जब तक यीशु मसीह वापस ना जाए. (2 पतरस 1:19)

माँ-बाप बच्चे को सिर्फ जन्माते और उसका अच्छे भोजन से पोषण ही नहीं करते, वे इस बात के लिए भी प्रयत्नशील रहते हैं कि उनका बच्चा सुरक्षित रहे। हम विश्वासी वचन से जन्मे हैं और वचन के द्वारा प्रभु में बढ़ रहें हैं।  सुखद और प्रोत्साहनवर्धक लगेगा आपको यह जानना कि आप विश्वास में अंत के दिन तक वचन के द्वारा ही सुरक्षित रहेंगे।

इफिसियों 5:26-27 में हमने देखा कि मसीह अपनी दुल्हन कलीसिया को वचन के द्वारा ही सम्पूर्ण रूप से शुद्ध करके स्वर्ग ले जायेगा। यदि स्वर्ग में प्रवेश करना सिर्फ उन्ही का होगा जो वचन के द्वारा शुद्ध किये गए हैं तो हमें कितने अधिक प्रयत्न करने चाहिए वचन के द्वारा पवित्रीकरण में बढ़ने के!

पौलुस प्रेरितों के काम 20:32 में विश्वासियों को वचन के हाथ में छोड़ कर जाता हैं – वचन जो कि उनको आत्मिक रूप से बढ़ाने में और सब पवित्र किए गए लोगों में साझी करके मीरास देने में (अर्थात स्वर्ग पहुंचाने में) समर्थ हैं।

पतरस भी पौलुस की ही बात को प्रतिध्वनित करते हुए कहता हैं कि विश्वासियों के लिए भोर का तारा उदय होने तक (अर्थात यीशु मसीह के पुनरागमन तक) वचन पार ही ध्यान किये रहना अच्छा है।  दूसरे शब्दों में यदि हमें हमारे मालिक प्रभु यीशु मसीह के द्वितीय आगमन के लिए तैयार रहना है , तो वो सिर्फ और सिर्फ वचन के ही द्वारा है।

प्रोत्साहन: हम हजार बार बाइबल पढ़ने में असमर्थ हुए होंगे, लेकिन आज एक नया दिन है- फिर से शुरुआत करें। हम विश्वासी लोग बाइबल पढ़ने में इसलिए असमर्थ नहीं होते हैं क्योंकि हम अनिच्छुक हैं , परन्तु इसलिए कि हममें योजना और अनुशासन की कमी है । नीचे हम सब को बाइबल पढ़ने में समर्थ होने के लिए कुछ व्याहवारिक सलाह है:

  • एक जगह निर्धारित कर लें जहाँ आप रोज बाइबल पढ़ेंगे।
  • एक समय निर्धारित कर लें जब आप बाइबल पढ़ेंगे।
  • एक बाइबल पठन योजना (Bible Reading Plan) का प्रिंट आउट रखें जिस में आप रोज का अंश पढ़ कर टिक करेंगे।
  • एक डायरी और पेन रखें, जिसमे आपने जो सीखा वो संक्षिप्त में लिख सकें।
  • एक प्रार्थना सूची (Prayer List) रखें जिसमे से आप प्रार्थना कर सकें।

उदहारण प्रार्थना:  है पिता मुझे क्षमा कर दीजिये आपके वचन की उपेक्षा करने के लिए। मुझे अनुग्रह दीजिये की मैं आपके वचन को पढ़ने,अध्ययन करने और इस पर मनन करने वाला हो सकूं। मुझे आप अपने वचन में सुरक्षित रखिये।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional): पवित्रशास्त्र की पर्याप्तता की शिक्षा, नया जन्म, पवित्रीकरण और महिमा में प्रवेश करने की शिक्षाएं  (Doctrine of the All Sufficiency of Scriptures; Doctrines of Regeneration, Sanctification and Glorification, especially the Role of God’s Word in them)

अधिक अध्ययन करने के लिए:

  • Value of the Word of God by John MacArthur:

https://www.youtube.com/watch?v=NERiuyHLKZk

  • The Word of God in Spiritual Growth by John MacArthur:

https://www.youtube.com/watch?v=tjJpts1UL98

http://logosinhindi.com/साप्ताहिक-शैक्षणिक-भक्ति

फीडबैक : पिछले साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (Weekly Doctrinal Devotional) पर आये आपके फीडबैक से मैं काफ़ी प्रोत्साहित हूँ ।  आप इस बार भी नीचे फीडबैक दें सकते हैं।

 

4 thoughts on “साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -2)”

  1. Anita saini says:

    Thank u… Bahut encourage kiya…
    Godliness k liye hame apne aap ko every day anushashit karna h…vachn maman karne se hi ham encourage hote h…

  2. Seema sangeliya says:

    Thank you bhaiya…vachan ki importance ko batane k liye….m encourage hui….God bless you

  3. Seema says:

    Thank you so much bhaiya…. I’m blessed
    Masih Jeevan m SB Kuch vachan se hota h or hum kitni bar vachan ko hi side kr dete h…… Is badi Galti ko mene Jana ….. Masih Jeevan vachan se hi strong hoga mene Sikha thank you…

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