साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -1)


बाइबल काफी है।

पुराने नियम में सारे उद्धार पाए संतों में पवित्र आत्मा रहता था लेकिन सब को पवित्र आत्मा के वरदान नहीं दिए जाते थे। जब यहोशू ने मूसा से एलदाद और मेदाद को भविष्यवाणी करने से रोकने को कहा तो मूसा ने ये इच्छा प्रकट की:

मूसा ने उससे कहा, “क्या तू मेरे कारण जलता है? भला होता कि यहोवा की सारी प्रजा के लोग नबी होते, और यहोवा अपना आत्मा उन सभों में समवा देता!” (गिनती 11:29)

बाद में मूसा की यह इच्छा योएल भविष्यवक्ता की भविष्यवाणी बनी । (योएल 2:28-29) और यह भविष्यवाणी पतरस के अनुसार चर्च की स्थापना के समय पूरी हुई:

परन्तु यह वह बात है, जो योएल भविष्यद्वक्‍ता के द्वारा कही गई थी :
परमेश्‍वर कहता है, कि अन्त के दिनों में
ऐसा होगा कि मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उँडेलूँगा,
और तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियाँ भविष्यद्वाणी करेंगी,
और तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे, और तुम्हारे पुरनिए स्वप्न देखेंगे।
वरन् मैं अपने दासों और अपनी दासियों पर भी
उन दिनों में अपने आत्मा में से उँडेलूँगा,
और वे भविष्यद्वाणी करेंगे। (प्रेरितों 2:16-18)

मोटे रूप से नए नियम के हर संत के पास पवित्र आत्मा का अभिषेक और उसका कोई ना कोई वरदान होता है।

किन्तु सब के लाभ पहुँचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है। (1 कोरिंथ .12:7)

तो क्या आज भी परमेश्वर हमसे भविष्यवाणियोंऔर स्वप्न दर्शनों के द्वारा बात कर रहा है । नहीं, ये वरदान सिर्फ तब के लिए थे जब तक की नया नियम पूरा ना हो जाए। इब्रानियों 1:1 के अनुसार परमेश्वर हमारे बाप दादाओं से अलग अलग तरह से अर्थात स्वप्न-दर्शन,स्वर्गदूतों और भविष्यवाणियों के द्वारा बात करता था, लेकिन अब वह अपने पुत्र के ही द्वारा बात कर चुका, जिसकी बातें पवित्र आत्मा ने प्रेरितों से नए नियम की किताबों में लिखवाई:

पूर्व युग में परमेश्‍वर ने बापदादों से थोड़ा थोड़ा करके और भाँति-भाँति से भविष्यद्वक्‍ताओं के द्वारा बातें कर, इन अन्तिम दिनों में हम से पुत्र के द्वारा बातें कीं, (इब्रानियों 1:1)

ध्यान दीजिये परमेश्वर बात कर चूका, अब वो नए प्रकाशनों के द्वारा बात नहीं कर रहा। हम मसीह में परिपूर्ण हैं:

और तुम उसी में भरपूर (complete) हो गए हो जो सारी प्रधानता और अधिकार का शिरोमणि है। (कुलुस्सियों 2:10)

पतरस बताता है की हमे जीवन और धार्मिकता से सम्बंधित सारी चीज़ें परमेश्वर के ज्ञान के द्वारा अर्थात उद्धार के समय मिल गई:

क्योंकि उसकी ईश्‍वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्‍ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है। (2 पतरस 1:3)

पौलुस हमे सिखाता है की मसीही जन को सिद्ध/परिपक्व बना देने के लिए पर्याप्त है। हमे किसी नए प्रकाशन की जरुरत नहीं है।

सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धार्मिकता की शिक्षा के लिये लाभदायक है, ताकि परमेश्‍वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए। (2 तिमुथियस 3:16-17)

पौलुस इफिसियों में प्रेरितों और भविष्यवक्ताओं को कलीसिया की नीव बोलता है:

और प्रेरितों और भविष्यद्वक्‍ताओं की नींव पर, जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु स्वयं ही है, बनाए गए हो। (इफिसियों 2:20)

अर्थात प्रेरित और भविष्यवक्ता के होने के वरदान अब किसी को नहीं दिए जाते। चर्च की स्थापना हुए 2020 साल हो गए हैं। क्या कोई 2020 वीं मंजिल पर नीव डालता है? नहीं ना? तो आज जो कोई भी अपने आप को प्रेरित और भविष्यवक्ता कहे और नए प्रकाशन दे वो झूंठा है। याद रहे :
मसीहयत में कुछ भी नया नहीं है सिवाय उसके जो झूंठ है। (चार्ल्स स्पर्जन )

यहूदा भी हमको सिखाता है की हमको एक ही बार में हमेशा के लिए सिद्ध वचन सौंप दिया गया है जिसको भ्रष्ट होने से या जिसमे कुछ जुड़ने या घटने को रोकने के लिए हमे प्रयत्नशील रहना चाहिए :

मैं ने तुम्हें यह समझाना आवश्यक जाना कि उस विश्‍वास (वचन) के लिये पूरा यत्न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सदा के लिए सौंपा गया था।

पतरस ने भी हमको यही सिखाया है इसी वचन पर ध्यान किये रहें जब तक भोर का तारा ना उदय हो जाये अर्थात यीशु मसीह ना आ जाये। उसने आपको यह नहीं सिखाया की स्वप्न-दर्शनों और भविष्यवाणियों की खोज में रहो -वह तो झूंठे शिक्षकों करते हैं

तुम यह अच्छा करते हो जो यह समझकर उस पर ध्यान करते हो कि वह एक दीया है, जो अन्धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे. (2 पतरस 1:19)

अंत में में आपको पवित्र आत्मा की लगी हुई छाप दिखा देता हूँ की अब कुछ जुड़ेगा नहीं और घटेगा नहीं:

मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूँ : यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्‍वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्‍वर उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा।

पवित्र आत्मा ने पुराने नियम को मलाकी की किताब के साथ अंत किया लेकिन वहां यह छाप नहीं लगाईं। ये छाप प्रकाशित वाक्य के अंत में लगी। इन आयतों के अनुसार जो कोई भी इसमें कुछ जोड़ेगा वो नरक में जाएगा और वहां उसकी सजा और बड़ा दी जाएगी।

प्रोत्साहन: आपको शायद यह लग रहा होगा की हमारे अनुभव का क्या। हमने तो स्वप्न दर्शन आदि का अनुभव किया है। मैं आपको प्रभु यीशु मसीह और बाइबल के परमेश्वरीय लेखक पवित्र आत्मा के नाम से प्रोत्साहित करना चाहता हूँ की अपना आधार अपने अनुभव को ना बनाये, क्योंकि आपके अनुभव एक मनोवैज्ञानिक धोखा हो सकता है। हमने कुछ लोगो को ऊपर लिखी शिक्षा का अध्ययन करने के बाद गवाही देते देखा की वो धोखे में थे और भावात्मक रूप से उत्तेजित सभाओं में अपनी भावनाओं में आकर भविष्यवाणियां कीं और दर्शन देखे। अब वो धोखे से आजाद है।

उदहारण प्रार्थना: है पिता मुझे क्षमा कर दीजिये, क्योंकि मैं आपके सिद्ध वचन पर ध्यान लगाने के बजाय स्वप्न दर्शनों और भविष्यवाणियों के पीछे लग रहा था। मैं आपके वचन को पढ़ने,अध्ययन करने और इस पर मनन करने वाला हो सकूं। मुझे आप आपके वचन में सुरक्षित रखिये और शैतान के झूँटों से बचाइए।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional): पवित्रशास्त्र की पर्याप्तता की शिक्षा (Sufficiency of Scripture; Sola Scriptura, Cessation of Revelatory Gifts)

अधिक अध्ययन करने के लिए:

1. Does God Still Give Revelations? : John MacArthur

2. The Sufficiency of Scriptures: John MacArthurhttps://www.youtube.com/watch?v=lwDoH7VzNxA&list=PL3a1yWhpkmlP_yojkCraXGSVTtlT2wHP6

3. The Sufficiency of Scriptures: compellingtruth.org
https://www.compellingtruth.org/sufficiency-of-scripture.html

4. Is God Still Giving New Revelations?: Logos Bible Study Ministry

संपर्क: यदि आप अपना फीडबैक देना चाहते हैं तो नीचे दिए लिंक पर दे सकते हैं।

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5 thoughts on “साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -1)”

  1. Ajay says:

    यह मेरे लिए एकदम नया है, जिसे मैं समझने की कोशिश कर रहा हूं। मैं तो अभी तक पवित्र आत्मा का आना, दर्शन , भविष्यवाणियों को सही मानता आया हूं।
    पंकज भईया से मेरा आग्रह है कि वो इस विषय पर Sunday को विस्तृत शिक्षा दें। प्रभु का धन्यवाद हो।

    1. Yogesh says:

      Nice article

  2. Anita saini says:

    Thank u bhaiya.. Ham bi apne experience liye emotion m chal rahe th.. Bible k en vachno ko jo khare h.. Unhe hi pakad kar chal sake..

  3. Seema says:

    Thank you bhaiya…. it’s true…

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