क्या गुड फ्राइडे मनाना बाइबल के ख़िलाफ़ है? साप्ताहिक शैक्षणिक भक्ति सन्देश (सप्ताह -13)

easter scene with crown of thorns, hammer and nails with blood on sand

(गुड फ्राइडे को हम प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु को याद करते हैं।)

हाँ यह सही है कि ना तो बाइबल हमे गुड फ्राइडे मनाने को कहती है; ना ही हम बाइबल में किसी को गुड फ्राइडे मनाते देखते हैं। तो सवाल यह है की क्या हमें गुड फ्राइडे मनाना चाहिए ? चूँकि बाइबल हमे इस बारे में कुछ नहीं कहती इसलिए हमे इस बारे में कोई कट्टर राय नहीं बनानी चाहिए। जो मनाते हैं वे विश्वास से मनाये, क्योंकि:

जो कुछ विश्‍वास से नहीं, वह पाप है। (रोमियों  14:23)

और जो नहीं मनाते हैं वे किसी और की अनावश्यक आलोचना ना करें। मेरी नज़र में गुड फ्राइडे मनाना कोई पाप नहीं है। गुड फ्राइडे को हम क्या करते हैं ? मूर्तिपूजा ? नहीं। शैतान की पूजा ? नहीं। व्यभिचार ? नही। गुड फ्राइडे को हम प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु को स्मरण करते हैं, उसका धन्यवाद करते हैं, उसकी स्तुति करते हैं। प्रार्थना करते हैं। एक दूसरे को प्रभु के लिए जीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। एक दूसरे को खाने पर बुलाते हैं। उपहार देते हैं। सुसमाचार का प्रचार करते हैं। प्रभु की मृत्यु का स्मरण, उसका धन्यवाद, उसकी स्तुति, प्रार्थना, भाइयों को प्रोत्साहित करना, अतिथि सत्कार, उपहार देना, सुसमाचार प्रचार आदि आदि कब से पाप हो गए? मूर्ख हैं वो लोग जो प्रभु को धन्यवाद देने के बजाय ये पूरा दिन और इसके आसपास के कई दिन ऑनलाइन या आमने सामने मिलकर गुड फ्राइडे मनाने की आलोचना करते रहते हैं और लोगों से लड़ते रहते हैं। ये लोग कितनो का आनंद बिगाड़ देते हैं और कितनों को भ्रमित कर देते हैं! इसके बजाय ये प्रार्थना, आराधना, संगति के द्वारा पवित्र आत्मा से भर जाएँ और लोगों के बीच में प्रभु का आनंद बाँटें तो कितना भला हो।

तो आप समझ गए होंगे की गुड फ्राइडे मनाना पाप नहीं है। पाप यह होगा यदि कोई कहे कि बाइबल में गुड फ्राइडे मनाने की आज्ञा दी गई है या ये कहे कि वो लोग जो गुड फ्राइडे नहीं मना रहे हैं, वो पाप कर रहें हैं। यह बाइबल में जोड़ने का पाप हो जायेगा (प्रकाशितवाक्य 22:18)। परन्तु गुड फ्राइडे मनाना पाप नहीं है।

अब मैं आपको बताना चाहता हूँ की गुड फ्राइडे को हम जो करते हैं वो हम बाकी के दिन भी करते हैं और हर रविवार को और भी ज्यादा करते हैं। आप कहेंगे कैसे ? क्या आप रोज प्रभु की कुर्बानी को याद करके उसकी प्रशंसा नहीं करते ? क्या आप रोज आपके पापों की क्षमा के लिए उसकी कुर्बानी के लिए उसे धन्यवाद नहीं करते ? क्या आप रोज कोई ना कोई गोस्पल सॉन्ग नहीं गाते या सुनते जिसमे यीशु मसीह के क्रूस का जिक्र होता है। आप जब रोज बाइबल पढ़ते हैं तो क्या बाइबल का हर दिन का भाग यीशु मसीह और उसके द्वारा किये काम की और इशारा नहीं करता ? करते हैं ना फिर ? और जब रोज आप अपने पापों की क्षमा माँगते हैं, तो किस आधार पर माँगते हैं ? क्रूस के आधार पर। यीशु मसीह के लहू के आधार पर। हर रविवार को चर्च में होने वाली आराधना में आधे से ज्यादा गीत प्रभु की कुर्बानी का स्मरण नहीं कराते क्या ? हर मैसेज में यीशु मसीह और उसका गोस्पल नहीं होता क्या ? चर्च की हर प्रार्थना में उसकी कुर्बानी का जिक्र किसी ना किसी तरह से नहीं आता क्या ? और हर रविववार को प्रभु भोज नहीं होता क्या ? क्या मतलब होता है उसका ? हम प्रभु यीशु मसीह की महिमावान कुर्बानी पर ही तो मनन करते हैं (1 कुरिन्थियों 11:26)। कई चर्चों में तो दो सन्देश होते हैं, जिसमे से एक सिर्फ प्रभु की मृत्यु पर ही आधारित होता है। गुड फ्राइडे को भी तो आप यही करते हैं। फिर यह पाप कैसे हो गया ? क्या इसलिए की और भी ज्यादा फोकस के साथ कर लिया ? क्या प्रभु प्रसन्न नहीं होता जब वो देखता है की हम उत्साह से अपना मन और भी ज्यादा उसकी और लगाते हैं ?

मैं आपको बताना चाहता हूँ की यीशु मसीह के क्रूस की गाथा पर ध्यान करके और उसकी महिमा गा के हम त्रिएक परमेश्वर को अत्यंत प्रसन्न करते हैं, क्योंकि इस क्रूस पर परमेश्वर ने अपनी महिमा के लिए अपने महान प्रेम और अनुगृह का प्रदर्शन किया।

मैं निम्न आयत और इसके अर्थ की और आपका ध्यान खींच कर ख़त्म करना चाहता हूँ।

ऐसा न हो कि मैं अन्य किसी बात का घमण्ड करूँ, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का। (गलतियों  6:14)

हमारा मनन, हमारी बातें, हमारे गीत, हमारा घमंड सब कुछ का आधार यीशु मसीह का क्रूस होना चाहिए। क्यों ? क्योंकि इसी के आधार पर हमारे और परमेश्वर के बीच में शांति स्थापित हुई। इसी के आधार पर हमारे पाप क्षमा हुए। इसी के आधार पर हम नरक से बच गए। इसी के आधार पर हमें पवित्र आत्मा मिला। इसी के आधार पर हमे नया जन्म, विश्वास और पश्चाताप का दान मिला। इसी के आधार पर हमे सच्चा आनंद, सच्ची शांति , सच्ची ज्योति, सच्ची आशा और सच्ची सामर्थ मिली। यही हमारे जीवन का आधार है। जब प्रभु क्रूस पर मरा तो मृत्यु मर गई और अब हम हमेशा के लिए जियेंगे।

प्रोत्साहन:
मैं निम्न गीत के द्वारा आपको प्रोत्साहित करना चाहता हूँ :

मसीह बिना जीना बेकार है,
मसीह बिना जीना बेकार है,
वही मेरे जीवन का आधार है, (2)
जीना मसीह है मरना नफा है – 3
ये जीवन तैयार है मसीह

1. क्रूस उठाके मैं चलने लगा – 2
मेरा मालिक* यीशु मसीह है,
क्रूस उठाके चलना मेरा काम है,
अंत में स्वर्ग में विश्राम है
जीना मसीह है मरना नफा है – ३

2. मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ गया,
मैं मसीह में हूँ मसीह मुझ में है,
आत्मा बिना जीना बेकार है,
वहीं मेरे जीवन का आधार है
जीना मसीह है मरना नफा है – 3

उदाहरण प्रार्थना:
है पिता तेरा धन्यवाद तेरे प्यारे बेटे यीशु मसीह के क्रूस के लिए। उस क्रूस के द्वारा मसीह ने मुझे खरीद लिया। है पिता मैं मसीह की गुलामी में और बढ़ सकूं, क्योंकि मैं जितना उसकी गुलामी में बढूंगा उतना ज्यादा पाप से स्वतंत्र होऊंगा। मुझ पर दया कर। तेरे बेटे के नाम से। आमीन।

शिक्षाएं (Doctrines Involved in this Devotional):
यीशु मसीह का उसके लोगों के लिए मरने की शिक्षा, प्रायश्चित की शिक्षा (Doctrine of Atonement)

अधिक अध्ययन करने के लिए:

  • John MacArthur: Why Did Jesus Have to Die?

https://www.youtube.com/watch?v=RhIBZkJ-TrA

  • John Piper: Fifty Reasons Why Jesus Came to Die

https://www.desiringgod.org/books/fifty-reasons-why-jesus-came-to-die

  • John Piper: Did Christ Die for Us or for God?

https://www.desiringgod.org/messages/did-christ-die-for-us-or-for-god–2

 

 

 

6 comments

  1. Thank you bhaiya…. true meaning and true way smjhane k liye ?…sari chije God ki mahima k liye hi kre ….. God bless you

  2. Thank you bhya ….sahi me humara jeevan sirf prabhuyki di hui dan h or humesa hum Prabhu ka dhnyawad kare

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